आईटीआई कॉलेज और छात्रावास की जमीन पर निजी दावे से मचा बवाल, फर्जी पट्टे की आशंका पर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

आईटीआई कॉलेज और छात्रावास की जमीन पर निजी दावे से मचा बवाल, फर्जी पट्टे की आशंका पर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

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अंबिकापुर। राजपुर 

(समाचारवाणी) 

बलरामपुर जिले के राजपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत करजी में संचालित आईटीआई कॉलेज एवं छात्रावास की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शासकीय भूमि पर फर्जी तरीके से पट्टा जारी कर एक निजी व्यक्ति ने अपना दावा ठोक दिया है। मामले के सामने आने के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है और ग्रामीणों ने जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तथा चक्काजाम की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार ग्राम करजी के उद्देनु पारा में आईटीआई कॉलेज और छात्रावास पिछले लगभग 15 वर्षों से संचालित हैं। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा इस संस्थान का लोकार्पण भी किया गया था। वर्तमान में कॉलेज परिसर में बाउंड्री वॉल (अहाता) निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया था। इसी दौरान एक निजी व्यक्ति द्वारा निजी भूमि बताकर बाउन्ड्री वाल निर्माण को निजी व्यक्ति द्वारा तहसील कार्यालय से स्थगन कर दिया जिसके बाद बाउंड्री वाल निर्माण को रोक दिया गया। इसके बाद पूरा मामला गांव में चर्चा का विषय बन गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यक्ति के नाम पर पट्टा जारी हुआ है, उसके बारे में गांव के अधिकांश लोगों को कोई जानकारी नहीं है। उनका आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज किया गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि भूमि निजी स्वामित्व की थी, तो फिर पिछले डेढ़ दशक से वहां शासकीय आईटीआई कॉलेज और छात्रावास का संचालन कैसे हो रहा था।

 सूत्रों के मुताबिक हैरानी की बातें है कि जिस शासकीय जमीन पर निजी व्यक्ति ने पट्टा का दावा किया है उस भूमि में वर्तमान में अधिकारियों से साथ मिलकर एन एच् में हो रही चौड़ीकरण का मुआवजा भी राशि लिया गया है।

ग्राम करजी के सरपंच संजय कुमार ने बताया कि आईटीआई कॉलेज और छात्रावास का निर्माण लगभग 15 वर्ष पूर्व शासकीय भूमि पर हुआ था। उनके अनुसार जिस व्यक्ति मदन सिंह के नाम पर पट्टा जारी हुआ है, वह तीन से चार वर्ष पहले का बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच की मांग करते हुए आवेदन भी दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यदि पट्टा निरस्त नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीण सुरेश यादव ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि पट्टा कब और किन परिस्थितियों में जारी हुआ, इसकी जानकारी गांव के लोगों को नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने पट्टा निरस्त नहीं किया तो 9 जून को ग्रामवासी आंदोलन करेंगे।

ग्राम पंचायत करजी के सचिव सुनील तिवारी ने बताया कि आईटीआई भवन और छात्रावास का निर्माण सन 2011 में कार्य प्रारंभ हुआ था। बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए सीमांकन कराकर कार्य स्वीकृत किया गया था, लेकिन एक निजी व्यक्ति द्वारा पट्टा का दावा कर बाधित किया जा रहा है।

मामले को लेकर राजपुर तहसीलदार कावेरी मुखर्जी ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। बाउंड्री वॉल निर्माण, नक्शा, खसरा तथा संबंधित भूमि अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है। जिस व्यक्ति के नाम पर पट्टा जारी हुआ है, उसे नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यदि पट्टा फर्जी पाया जाता है तो नियमानुसार उसे निरस्त कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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