62 वर्षीय महिला ने सरपंच पर जबरन गड्ढे खुदवाकर पौधरोपण कराने का लगाया आरोप, तीन महीने से अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद न्याय नहीं मिलने की शिकायत

62 वर्षीय महिला ने सरपंच पर जबरन गड्ढे खुदवाकर पौधरोपण कराने का लगाया आरोप, तीन महीने से अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद न्याय नहीं मिलने की शिकायत

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  •  60–70 साल से बसे घर की जमीन पर 50 मजदूरों से खुदाई का आरोप, ₹2 लाख का ड्रिप सिस्टम तबाह.
  • 62 वर्षीय महिला ने सरपंच पर जबरन गड्ढे खुदवाकर पौधरोपण कराने का लगाया आरोप, तीन महीने से अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद न्याय नहीं मिलने की शिकायत.

Report- Saurabh sahu 

 सूरजपुर।खड़गवां 

खड़गवां निवासी 62 वर्षीय नरमादिया पति रामकिशुन ने अपनी जमीन और घर के आसपास की भूमि को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि जिस भूमि पर वह अपने परिवार के साथ कई दशकों से निवास करती आ रही है और जिसे लेकर उसके पास पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक (RI) द्वारा लिखित दस्तावेज होने का दावा है, उस भूमि पर 7 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत के सरपंच ओमप्रकाश सिंह करीब 50 मजदूरों के साथ पहुंचे और उसकी बड़ी/बाड़ी में जबरन गड्ढे खुदवाने शुरू कर दिए।

महिला के मुताबिक, उसने मौके पर इसका विरोध करते हुए सरपंच से काम रोकने की मांग की, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद खुदाई जारी रखी गई। शिकायत में कहा गया है कि बाड़ी में करीब ₹2 लाख की लागत से लगाया गया ड्रिप सिंचाई सिस्टम भी खुदाई के दौरान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

“ पौधरोपण के लिए गड्ढे किए जा रहे हैं” — महिला का आरोप

आवेदन में नरमादिया ने आरोप लगाया है कि जब उसने सरपंच से गड्ढे खोदने का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि उक्त स्थान पर पौधरोपण किया जाएगा। महिला का कहना है कि इसके बाद उसके घर के आसपास बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए और वहां पौधे लगा दिए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस स्थिति के कारण उसे अपने ही घर से बाहर निकलने, आने-जाने और आसपास बैठने में परेशानी हो रही है। यहां तक कि घर के पास स्थित कुएं से पानी लेने जाने में भी दिक्कत हो रही है, क्योंकि रास्ते में बड़े-बड़े गड्ढे और पौधे लगाए गए हैं।

 1988 और 2001 में लगान पटाने का भी दावा 

नरमादिया ने अपने आवेदन में दावा किया है कि वह और उसका परिवार लंबे समय से इस भूमि पर निवास कर रहा है। उन्होंने बताया है कि भूमि को लेकर पटवारी एवं RI द्वारा लिखित रूप में अधिकार संबंधी दस्तावेज दिए गए थे तथा 1988 और 2001 में भूमि का लगान भी पटाया गया था। महिला का सवाल है कि यदि वह वर्षों से अपने परिवार के साथ इस स्थान पर निवास कर रही है और भूमि को लेकर उसके पास राजस्व संबंधी दस्तावेज हैं, तो बिना उसकी सहमति के उसके घर-बाड़ी में खुदाई और पौधरोपण किस आधार पर कराया गया?

 कलेक्टर से लेकर तहसील कार्यालय तक शिकायत, फिर भी नहीं मिला समाधान

शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के बाद से वह लगातार न्याय के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रही है। आवेदन में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और तहसील कार्यालय में शिकायत देने की बात कही गई है। महिला के अनुसार, करीब तीन महीने बीत जाने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। 62 वर्षीय महिला ने प्रशासन से मौके की जांच कराने, जमीन एवं दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट करने तथा उसके घर-बाड़ी में की गई खुदाई एवं पौधरोपण की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

 बड़ा सवाल: आखिर किसके आदेश पर हुई खुदाई? 

पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला की निजी उपयोग वाली बाड़ी में करीब 50 मजदूरों को भेजकर खुदाई और पौधरोपण किस आदेश अथवा स्वीकृति के आधार पर कराया गया? यदि भूमि शासकीय है तो उसका सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड क्या कहते हैं? और यदि महिला के दावे के अनुसार भूमि पर उसके अधिकार संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं, तो कार्रवाई से पहले संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच क्यों नहीं की गई?


यह पूरा मामला राजस्व रिकॉर्ड, भूमि की वास्तविक स्थिति, पौधरोपण के आदेश तथा ड्रिप सिस्टम को हुए कथित नुकसान की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। शिकायतकर्ता ने आवेदन में यह भी कहा है कि यदि भविष्य में उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए सरपंच ओमप्रकाश सिंह एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरपंच अथवा प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

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