पुलिस आरक्षक को ट्रेक्टर से कुचलने के चार आरोपी झारखण्ड से गिरफ्तार

पुलिस आरक्षक को ट्रेक्टर से कुचलने के चार आरोपी झारखण्ड से गिरफ्तार

samacharvani.com
0

 

बलरामपुर


(समाचारवाणी)

बलरामपुर जिले के सनावल थाना  इलाके के लिबरा गांव में 11 मई की रात अवैध रेत परिवहन की शिकायत पर कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम पर रेत माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में कांस्टेबल शिवबचन सिंह की ट्रैक्टर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद यह मामला प्रदेश भर में गरमा गया था. इस बीच आज मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और घटना में प्रयुक्त दो ट्रैक्टरों को भी जब्त कर लिया है। इस घटना की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

मामले में सनावल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 103(1), 109, 121(1), 132, 221, 61(2), 3(5), 238, 249 एवं भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33(1) (ख), 52 तथा खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की धारा 04/21 के तहत मामला दर्ज किया था। एसपी द्वारा गठित चार टीमें लगातार झारखंड में छापेमारी कर रही थी।

झारखण्ड से चार आरोपी हुए गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में आरोपी आरीफूल हक (24 वर्ष), जमील अंसारी (41 वर्ष), शकील अंसारी (22 वर्ष), तीनों निवासी सेराजनगर, जिला गढ़वा (झारखंड) एवं अकबर अंसारी (50 वर्ष) निवासी अरसली, गढ़वा (झारखंड) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो ट्रैक्टर जब्त किए हैं। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

बिलासपुर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

मामले को बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान में लेकर सुनवाई करते हुए डीजीपी, खनिज सचिव व वन विभाग को नोटिस जारी किया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि, अवैध खनन रोकने निर्देश के बाद यह हालत है, जो बहुत ही गंभीर बात है। स्टेट अफेयर्स की ऐसी हालत है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस एवं वनविभाग ने रेत तस्करी रोकने ताकत झोंकी है।

पुलिस पर तस्करों के संरक्षण के आरोप पर टीआई सस्पेंड हुए थे। आरक्षक की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या के मामले में सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) दीपक कुमार झा ने सनावल थाना प्रभारी दिव्य कांत पाण्डेय को सस्पेंड कर दिया था।

झारखण्ड सीमा पर रेत तस्करी 

लिबरा में अवैध रेत खनन की शिकायत ग्रामीणों से पुलिस ने की थी। पुलिस ने शनिवार की शाम तीन ट्रैक्टरों को पकड़ा भी था, जिन्हें दूसरे दिन छोड़ दिया गया। मामले में राजनैतिक संरक्षण के आरोप भी लगे हैं। सरहद पर रेत माफिया किसके संरक्षण में लगातार रेत तस्करी कर रहे थे ये सवाल अनसुलझा है। झारखण्ड सरहद पर खनिज विभाग, राजस्व,वन अमला, पुलिस, प्रशासन के मौजूद रहते ये नेटवर्क लगातार चलता रहा। लोगों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन से लापरवाही हुई जिससे ये लोमहर्षक वारदात हुई।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)