रामगढ़ महोत्सव में हुआ सरस कवि-सम्मेलन का शानदार आयोजन

रामगढ़ महोत्सव में हुआ सरस कवि-सम्मेलन का शानदार आयोजन

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  •  सतपुड़ा-सी वादियां, छोटे-मोटे अबूझमाड़ रहने दो, बदौलत इन्हीं के है जलचक्र, धरा पर आषाढ़ रहने दो: विनोद हर्ष 
  • चल न संगी रामगढ़ देखे-बुले जाबो। सरगुजा कर महिमा सुघर गीत दूनों गाबो: कवि संतोष सरल

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अंबिकापुर। सरगुजा 

(समाचारवाणी) 

 जिला प्रशासन द्वारा रामगढ़ महोत्सव में सरस कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। राज्य के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति में श्रोताओं ने भगवान् राम के दिव्य गुणों से परिपूर्ण कविताओं का श्रवण-लाभ लिया और भरपूर आनंद भी। कवि-सम्मेलन का संचालन कवि संतोष दास 'सरल' ने किया।



शुभारंभ लोक संस्कृति कर्मी और वरिष्ठ गीतकार रंजीत सारथी द्वारा सरगुजिहा में प्रस्तुत श्रीराम-वंदना से हुआ- तोला भजो राम, गिरधारी, धनुषधारी मैं तोला भजो राम। कवि राजेश पांडेय ने प्रभु राम को संसार का पालनहारी बताकर उनकी उपस्थिति सबके हृदय में व्यक्त की- जगत् के पालक उनका नाम, बसे हैं हर धड़कन में राम। रोम-रोम में छवि प्रभु की है, प्रभु को मेरा प्रणाम। यही बात डॉ. पूनम दुबे 'वीणा' के गीत में भी अनुगूंजित हुई- मेरे अंतसमन में बसते हैं प्रभु राम, करती उन्हें प्रणाम। वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल ने राम नाम की महिमा का वर्णन किया- राम नांव कर महिमा में पखना हर उपलाय गइस। कवि प्रकाश कश्यप ने निष्काम कर्म करने का आह्वान करते हुए रामकृपा से ही जीवन में विश्राम मिलने की बात कही- जब तक मन में राम नहीं, जीवन में विश्राम नहीं। कर्म ही बंधन बन जाता है भाव अगर निष्काम नहीं। 

         कवि-सम्मेलन में नाम-जाप का महत्व कवि मुकुंदलाल साहू ने अपने दोहे में बताया- राम-नाम जपते रहो, करते-करते काम। बन जाएगा लोक यह, सभी सुखों का धाम। कवयित्री अंजू पांडेय ने रामराज्य लाने के लिए राम- जैसे कार्य करने की वकालत की- रामराज का सपना है तो कार्य राम-सा करना होगा। अपने भीतर के रावण से सबसे पहले लड़ना होगा। वरिष्ठ कवयित्री मंशा शुक्ला ने अपनी कविता में रामत्व भाव धारण से मानवीय दृष्टि परिवर्तित होने की बात कही- भाव रामत्व का मन में बसा लीजिए। देखिएगा नजरिया बदल जाएगा। गर यकीं है नहीं, आजमा लीजिए। वरिष्ठ गीतकार देवेंद्रनाथ दुबे ने अपने गीत में भारत की पावन भूमि पर विष्णु के रामावतार की चर्चा कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया- पुण्य भूमि है देश हमारा, सब देवों को प्यारा है। इसलिए तो विशुन देव ने लिया मनुज अवतारा है। राम को प्रेम प्यारा है- इस बात की सुंदर अभिव्यक्ति कवयित्री आशा पाण्डेय ने की- जिसने शबरी के प्रेम समर्पण का अभिनंदन स्वीकार किया। जिसने सिया का हरण किया उस रावण का संहार किया। भगवान राम से धरा धाम अभिराम होने की बात डॉ. माधुरी जायसवाल ने कही- ऋषि मुनियों की यह धारा कितनी पावन  सुंदर है। प्रभुराम की चरण रज से धन्य यहां का कण-कण है। 

कार्यक्रम में डॉ. अंचल सिन्हा ने जगत् जननी मां सीता के पावन चरित्र का उल्लेख करते हुए उनके समान किसी भी नारी को भविष्य में अग्नि परीक्षा के दौर से नहीं गुजरने की आश्वस्ति दिलाई- विदा प्राणनाथ! ईश्वर करे, किसी भी युग में किसी सीता को फिर कभी अपने सत्य का प्रमाण न देना पड़े। किसी नारी का समर्पण लोक अपवाद के आगे फिर कभी लज्जित न होना पड़े। 

कवि-सम्मेलन में कुछ कवियों ने रामगढ़ की महिमा का सुंदर बखान किया। डॉ. सपन सिन्हा ने तो यहां तक कह दिया कि- इन पहाड़ों का कितना नाम है। गुनगुनी धूप है, सुनहरी शाम है। यूं ही पावन नहीं, रामगढ़ की धरा। राम के आगमन से बंधा धाम है। 



कवयित्री अनीता मंदिलवार ने मेघों से रामगढ़ के संदेश-वाचन का अनुनय किया- हे मेघ तुम नभ में चलो, रामगढ़ का संदेश सुनाना। जहां राम के चरण पड़े थे, वहां प्रेम का दीप जलाना। अनुपम प्राकृतिक सुषमा, संस्कृति व पुरातत्व की ऐतिहासिक नगरी- रामगढ़ चलने का सहज आग्रह वरिष्ठ गीतकार संतोष दास 'सरल' ने अपने सुमधुर सरगुजिहा गीत रचना में किया- चल न संगी रामगढ़ देखे- बुले जाबो। सरगुजा कर महिमा सुघर गीत दोनों गाबो। डॉ. अजयपाल सिंह ने भारत भूमि को माता की संज्ञा देते हुए काव्यपाठ किया- कोई तुझको कहता जमीं है और किसी की वतन है तू। किसी ने तुझको देश कहा, मेरी तो बस मां है तू। 

कवि विनोद हर्ष की कविता से कवि-सम्मेलन का यादगार समापन हुआ- सतपुड़ा-सी वादियां छोटे-मोटे अबूझमाड़ रहने दो। बदौलत इन्हीं के है जलचक्र, धरा पर आषाढ़ रहने दो! इनके अलावा कवि राजेंद्र राज ने भी सरगुजिहा में अपनी रचना पढ़ी। आभार ज्ञापन डॉ. उमेश पांडेय ने किया। 

 कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज,विधायक प्रबोध मिंज,सामरी विधायक उद्देश्वरी पैकरा,सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो,जिला भाजपा अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया,वरिष्ठ भाजपा नेता आलोक दुबे सहित  कलेक्टर सरगुजा अजीत वसंत, एस पी. राजेश अग्रवाल, वरिष्ठ अधिकारी जनप्रतिनिधि एवं भाजपा पदाधिकारी कार्यकर्ता आसपास के ग्रामों के ग्रामीण जन एवं रामगढ़ विकास समिति के सदस्य मौजूद रहे।

साथ ही इस दौरान संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल, सहायक परियोजना समन्वयक करुणेश श्रीवास्तव, दीपमाला सिंह सहित बड़ी संख्या में काव्यप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। 



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