सन्ना पाट के कोरवा फंसे ठेकेदार के चंगुल में,अब हुई वापसी

सन्ना पाट के कोरवा फंसे ठेकेदार के चंगुल में,अब हुई वापसी

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जशपुर के बंधक पहाड़ी कोरवा वापस लौटे,प्रशासन ने कर्नाटक से कराई सुरक्षित वापसी



अंबिकापुर (सरगुजा)

(समाचारवाणी)

 सरगुजा संभाग में मानव तस्करी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। सरगुजा, जशपुर,बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, और एमसीबी जिले से बच्चों,महिलाओं, के साथ अब मजदूरों और विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा, पण्डो, बिरहोर, बैगा, कोडाकू जैसी अति पिछड़े जनजातियों को मजदूरी, अच्छे जीवन का प्रलोभन देकर तस्करी और शोषण का क्रम ज़ारी है। पिछले दिनों कई मामलों में दूसरे राज्यों से प्रशासन और पुलिस ने बंधक बनाकर रखे मजदूरों का रेस्क्यू ऑपरेशन किया और सुरक्षित वापसी की। 

 जशपुर जिले के सन्ना इलाके के रहने वाले 4 पहाड़ी कोरवा युवक पिछले एक साल से कर्नाटक के किसी बोरवेल कम्पनी में बंधुआ मजदूर के रुप में जीवन यापन कर रहे थे।  जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें आज ठेकेदार के चंगुल  से मुक्त कराकर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। सभी चारों युवक जशपुर जिले से पहाड़ी क्षेत्र सन्ना ब्लॉक के दूरस्थ अंचल राम पाठ के रहने वाले है । बताया जाता है कि एक साल पहले कुनकुरी से लगे रांझा डांड निवासी विवेक साहू चारो को अच्छी नौकरी का लालच देकर कर्नाटक ले गया था और उन्हें किसी बोरवेल कम्पनी के हवाले कर दिया। कम्पनी में चारो बंधुआ मजदूर की तरह रह रहे थे, क्योंकि मालिक ना तो उन्हें कार्य का मजदूरी दे रहा था ना ही उन्हें घर आने की अनुमति दे रहा था। ऐसे में उनके लिए जीवन जीना दुश्वार हो गया । आखिर में उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया ।सभी चारों ने अपना वीडियो बनाया और शेयर कर दिया।इन पहाड़ी कोरवा ने वीडियो में पूरी दास्तान को बयां किया और जब उनका वीडियो वायरल होते होते जशपुर कलेक्टर डॉ रवि मित्तल तक पहुंचा तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए श्रम विभाग के अधिकारियों की एक टीम बनाई और उन्हें युवकों के द्वारा वीडियो में बताए गए ठिकानों के लिए रवाना कर दिया। 

अभी जानकारी आ रही है कि चारो युवक हरि शनिचरण,सिकन्दर ,बृजमोहन और विनोद को रेस्कयू टीम के द्वारा वापस जशपुर ले आया गया है। बता दें कि यह कोई पहली ऐसी घटना नहीं है जब जशपुर के मजदूर बंधक बनाये गये हो।इससे पहले भी इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं ।जशपुर मानव व्यापार का हब माना जाता रहा है ।हांलाकि मानव व्यपार की घटनाओं में अभी कमी नहीं आयी है, लेकिन उसका तरीका बदल गया है। मौसमी पलायन औरपलायन होने वाले मजदूरों के शोषण का क्रम अभी भी जारी है ।



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