- तेरह वर्षीय किशोरी राधा की संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी पर लटकी मिली लाश के बाद परिजनों की मांग पर पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाही शुरू कराई।
- राजपुर पुलिस पर तत्काल कार्यवाही नहीं करने का लगा आरोप।
राजपुर(बलरामपुर)
समाचारवाणी न्यूज़
बलरामपुर जिले के राजपुर थाना अंतर्गत कुसमी मार्ग बूढ़ाबगीचा में 10 दिन पहले किशोरी की हत्या कर फांसी पर लटका देने का परिजन आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप जांच की मांग की थी। परिजनों ने किशोरी की लाश को मिर्जापुर के गंगा नदी में विसर्जन कर दिया था। पुलिस मिर्जापुर के गंगा नदी पहुंचकर गोताखोरों की मदद से चार दिनों तक किशोरी की लाश की तलाश की मगर कहीं पता नहीं चला।
ये है मामला..
ग्राम राज्यगढ़ जिला भीजीपुर यूपी निवासी। वर्तमान पता कुसमी मार्ग ग्राम बूढ़ाबगीचा निवासी 39 वर्षीय वाहन चालक जालिम सिंह पिता उद्दम सिंह, पत्नी गीता देवी व पुत्री खुशबू सिंह ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप कहा था कि भतीजी राधा कुमारी के साथ रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के यहां किराए के मकान लेकर रहते हैं। वाहन चलाने बाहर गया हुआ था और पत्नी गीता देवी तीर्थयात्रा में गई हुई थी। घर पर अकेली भतीजी राधा कुमारी (13) थी। सात अप्रैल दिन रविवार को मकान मालिक के पुत्र प्रशांत गुप्ता ने मोबाइल फोन कर बताया था कि आपकी भतीजी घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना उपरांत मौके पर पुलिस पहुंची थी और ग्रामीणों की मदद से किशोरी की लाश को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर लावारिस हालत में किशोरी की लाश को छोड़कर पुलिस बगैर मर्ग, पंचनामा, पोस्टमार्टम कराएं वापस लौट गई थी। किशोरी के परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर लाश को कब अपने साथ ले गए थे किसी को पता नही चल पाया था। वाहन चालक 10 अप्रैल को वापस राजपुर लौटा तो पता चला कि किशोरी को किसी ने फांसी लगाकर लटका दिया था किशोरी की दोनो पैर जमीन से लगा हुआ था। मौके पर एक सुसाइड नोट मिला था किशोरी की कॉपी से मिलान किया गया तो किसी और का लिखा हुआ था। परिजनों ने राजपुर पुलिस थाना प्रभारी सुधीर मिंज के पास पहुंचकरकहा कि मेरी भतीजी को किसी ने हत्या कर फांसी पर लटका दिया था जांच कराकर दोषियों के ऊपर करवाई करने की मांग की थी । आरोप है कि थाना प्रभारी नाराज़ होकर थाने से परिजनों को भगा दिया था। परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप किशोरी की मौत की जांच की मांग करते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की थी। वही पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता को थाना बुलाकर पूछताछ की थी। किशोरी के परिजन किशोरी की लाश को मिर्जापुर के गंगा नदी में विसर्जन कर दिया था। मिर्जापुर गंगा नदी किशोरी को ढूढ़ने के लिए राजपुर से चार पुलिसकर्मी व मिर्जापुर के गोताखोर चार दिन तक किशोरी की लाश की तलाश की मगर अधिक पानी व रेत होने के कारण किशोरी की लाश नही मिल सकी है। पुलिस चार दिन बाद वापस लौट आई।
मौत से उठे कई सवाल
एक किशोरी की मौत का मामला काफी संवेदनशील होता है। सामान्य तौर पर पुलिस तत्काल मामले की विवेचना शुरू करती है और मौके की जांच कर लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम करती है ।लेकिन इस मामले में लाश हॉस्पिटल के मर्चरी में छोड़ दी गई और परिजन वहां से किशोरी की लाश अपने गृह क्षेत्र मिर्जापुर के गंगा नदी में प्रवाहित कर घर लौट गए। यहां अस्पताल प्रबंधन और पुलिस विभाग के लापरवाही साफ नजर आ रही है कि इन्होंने तत्काल मामले में कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखाई और बिना पोस्टमार्टम के मृतक की लाश अस्पताल से ले जाने दी गई। इधर परिजनों को भी बिना पोस्टमार्टम लाश नहीं ले जाना था। पूरे मामले की बारीकी से जांच शुरू होनी चाहिए, और जो भी इसमें दोषी पाए जाते हैं, इनपर कार्यवाही हो। पॉस्को एक्ट के सभी मामलों पर विशेष नज़र हो। मामले में थाना प्रभारी का पक्ष नहीं लिया जा सका है ,लेकिन बलरामपुर के संवेदनशील पुलिस अधीक्षक डॉक्टर लाल उमेद सिंह द्वारा परिजनों की फरियाद सुनकर तत्काल जांच के निर्देश दिए जाने से राहत है कि अब ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा सक्रियता दिखाई जाएगी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑपरेशन शैलेंद्र पांडेय ने मीडिया को बताया कि किशोरी को ढूढ़ने के लिए राजपुर से चार पुलिकर्मी मिर्जापुर के गंगा नदी गए हुए थे वहां पुलिस की मदद से गोताखोर की टीम किशोरी की लाश को ढूढ़ने का काफी प्रयास किया मगर नदी में अधिक पानी व रेत होने के कारण किशोरी की लाश नही मिल पाई है। दुबारा पुलिस जाकर किशोरी की लाश को ढूंढेगी।


