राजपुर
(समाचारवाणी)
प्रतिवर्ष की भांति संत शिरोमणि परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की 269 वीं जयंती ग्राम सिधमा राजपुर जिला बलरामपुर में सतनाम पंथ के अनुनायियों द्वारा हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया ।
विदित हो कि छत्तीसगढ में सतनाम पंथ के प्रवर्तक पूज्य गुरुघासीदास बाबा समता एवं मानवता के प्रबल पक्षधर रहें हैं। उनका मानव-मानव एक समान का आदर्श एवं दर्शन समस्त विशव जनमानस के लिए समता, एकता, और अखंडता का प्रतीक है। सतनाम का सार यही है कि मिथ्या आडंबर, छल, प्रपंच, से विमुक्त आर्दश जीवन ही सत्य के मार्ग में एक साधन की तरह कार्य करता है। सतनाम स्वयं में एक साध्य है, इसे प्राप्त करने के लिए बाबा जी ने सात शिक्षा निर्देश स्वरूप दिए। जिसमें पहला सत्यनाम पर विश्वाम करना, दूसरा जीव हत्या नहीं करना, तीसरा माँसाहार न करना, चौथा नशा पान नहीं करना, पाँचवा-चोरी नहीं करना, छठवां व्याभिचार नहीं करना, सांवला जाति-पाति के प्रपंच में नहीं पड़ना शामिल है। उक्त शिक्षा, संदेश को आत्मसात करके व्यक्ति परम सत्य को प्राप्त कर जीवन सफल बना सकता है। इस प्रकार सतनाम पंथ एक आदर्श जीवन की कुंजी है जो 'मानव-मानव एक समान के ध्येय वाक्य को जन-जन तक प्रसारित कर समानता एवं एकता का संदेश देती है। सतनाम पंथ के संदर्भ में कुछ एतिहासिक परिदृश्य भी है, जिसमें सतनाम पंथ की स्थापना, (1672 ई.)सतनाम विद्रोह, तथा सतनाम मत का का प्रचार प्रसार शामिल है।
कार्यक्रम के अवसर पर संरक्षक श्री श्याम सुंदर जांगड़े प्राचार्य, ने बाबा जी के संदेशो को आत्मसात कर जीवन को सफल बनाने की सीख दी। उक्त कार्यक्रम में संयोजक श्री चंचल कुमार जांगड़े, जितेंद्र कुमार महिलांगे, शिव कुमार भारद्वाज, क्रांतिकुमार दिव्य, संदीप कोसले, आई. टण्डन, श्रीमती हेमलता जागड़े, श्रीमती लताखडवांग, श्रीमती पिंकी महिलांगे, श्रीमती पिंकी भारद्वाज, श्रीमती प्रियंका जांगड़े, श्रीमती रत्ना टंडन, श्रीमती गायत्री कोसले, सहित नन्हे बच्चे एवं सतनाम के अनुयायी एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में मंच संचालन विश्वनाथ खडवांग द्वारा किया गया।


