बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक के त्रिपुरी गांव में अवैध अफीम खेती के मामले की जांच करेगी टीम, ग्रामीणों से चर्चा कर प्रदेश कांग्रेस को सौंपेगी निष्पक्ष रिपोर्ट।
बलरामपुर | 10 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बलरामपुर जिले में सामने आए अवैध अफीम खेती के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। समिति के संयोजक के रूप में सामरी के पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम को नियुक्त किया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित यह टीम जल्द ही बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के त्रिपुरी गाँव पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात करेगी और पूरे मामले की जमीनी हकीकत की जांच करेगी।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में लगभग 6.30 एकड़ जमीन पर अवैध अफीम की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश कांग्रेस ने जांच दल गठित कर स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया है।
जांच दल गांव का दौरा कर ग्रामीणों से चर्चा, खेतों का निरीक्षण और संबंधित जानकारी एकत्र करेगा। इसके बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगा।
जांच समिति के प्रमुख सदस्य
जांच समिति में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से:
डॉ. प्रीतम राम – संयोजक (पूर्व विधायक सामरी)
भानुप्रताप सिंह – सदस्य (अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ )
डॉ. अजय तिर्की – सदस्य (पूर्व महापौर नगर निगम अंबिकापुर)
हरिहर प्रसाद यादव – सदस्य (जिलाकांग्रेस अध्यक्ष बलरामपुर)
राजेन्द्र तिवारी – सदस्य (पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस, बलरामपुर )
हरीश मिश्रा (ब्लॉक अध्यक्ष, कुसमी) – सदस्य
विजय पैकरा (ब्लॉक अध्यक्ष, शंकरगढ़) – सदस्य
अब्दुल्ला खान (ब्लॉक अध्यक्ष, चांदो) – सदस्य
राजेन्द्र भगत (अध्यक्ष, नगर पंचायत कुसमी) – सदस्य
श्रीमती फिलोमिना टोप्पो (अध्यक्ष, ब्लॉक महिला कांग्रेस) – सदस्य
प्रदेश कांग्रेस द्वारा गठित यह जांच टीम त्रिपुरी गांव पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा करेगी और पूरे मामले की निष्पक्ष रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। दुर्ग जिले के ग्राम समोदा और बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत त्रिपूरी के घोसरापारा क्षेत्र में लगभग 6.30 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती मिलने की सूचना के बाद प्रशासन ने खेतों को अपनी निगरानी में ले लिया है।
पुलिस की निगरानी में इन खेतों को सुरक्षित रखा गया है और मामले की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) तथा फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) से जांच कराए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि खेतों में वास्तव में अफीम की खेती की जा रही थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री दीपक बैज ने तत्काल जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति का संयोजन पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम को सौंपा गया है।
कांग्रेस संगठन की ओर से जारी पत्र के अनुसार समिति को निर्देश दिया गया है कि वह तत्काल संबंधित गांवों का दौरा कर मौके की स्थिति का निरीक्षण करे, खेतों का मुआयना करे और ग्रामीणों से चर्चा कर पूरी रिपोर्ट तैयार करे।
ग्रामीणों से चर्चा कर रिपोर्ट तैयार होगी
कांग्रेस नेतृत्व ने समिति के सदस्यों को निर्देशित किया है कि वे संबंधित गांवों में जाकर किसानों, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से चर्चा करें, यह पता लगाएं कि अफीम की खेती कब से हो रही थी और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका हो सकती है।
समिति अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की राजनीतिक और संगठनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
पत्र संगठन प्रभारी के हस्ताक्षर से जारी
यह आदेश 10 मार्च 2026 को जारी किया गया है। पत्र पर प्रभारी महामंत्री (संगठन एवं प्रशासन) मलकीत सिंह गैदू के हस्ताक्षर हैं। इसकी प्रतिलिपि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी गई है, जिनमें सचिन पायलट, भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं।
प्रशासन और राजनीति दोनों की नजर
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ पुलिस और जांच एजेंसियां खेतों की वैज्ञानिक जांच की तैयारी कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल भी पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अवैध अफीम की खेती के पीछे किसका हाथ है और यह खेती कितने समय से की जा रही थी।


