रपटा पुलिया बह जाने से पहाड़ी कोरवा, आदिवासी सहित ग्रामीण आबादी को हुई परेशानी,ब्लाक मुख्यालय से टूट गया संपर्क, उफिया के आश्रित ग्राम माकड़ बस्ती में ही कैद हुए ग्रामीण, पहाड़ी कोरवा बहुल आबादी को हुई मुश्किल

रपटा पुलिया बह जाने से पहाड़ी कोरवा, आदिवासी सहित ग्रामीण आबादी को हुई परेशानी,ब्लाक मुख्यालय से टूट गया संपर्क, उफिया के आश्रित ग्राम माकड़ बस्ती में ही कैद हुए ग्रामीण, पहाड़ी कोरवा बहुल आबादी को हुई मुश्किल

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 रपटा पुलिया बह जाने से पहाड़ी कोरवा, आदिवासी सहित ग्रामीण आबादी को हुई परेशानी,ब्लाक मुख्यालय से टूट गया संपर्क, उफिया के आश्रित ग्राम माकड़ बस्ती में ही कैद हुए ग्रामीण, पहाड़ी कोरवा बहुल आबादी को हुई मुश्किल.



अंबिकापुर। राजपुर 

(समाचारवाणी) 

 बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड में ग्राम पंचायत उफिया के आश्रित ग्राम माकड़ के करीब 500 ग्रामीणों का मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। राजपुर से जिगड़ी-माकड़ को जोड़ने वले मुख्य मार्ग पर स्थित कोदो कुमनी नाला पिछले चार दिनों से तेज बहाव के साथ उफान पर है। नाले पर रपटा पुलिगा बह जाने से ग्रामीणों का मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट गया। निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से ग्रामीण कमर भर पानी में डंडे के सहारे नाला पार करने को मजबूर हैं।

कुमनी नाला में निर्मित रपटा पुलिया बहा 



ग्रामीणें के अनुसार माकड़ गांव राजपुर मुख्यालय से करीत्र 15 किलोमीटर दूर स्थित है। हर वर्ष बरसात में इस नाले का जलस्तर बढ़ने से आवागमन प्रभावित होता है, लेकिन इस बार निर्माणाधीन पुल के कारण बनी अस्थायी रपटा पुलिया भी बह गई है। इससे बैंक, अस्पताल, तहसील, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए गांव का सीधा संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया है। जानकारी के अनुसार जिगड़ी-माकड़ पहुंच मार्ग पर कोदो कुमनी नाला पर 80 मीटर लंबे उच्चस्तरीय पुल 539.81 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वी


कृति 25 जुलाई 2025 को मिली थी। निर्माण कार्य का आदेश दी मार्च 2026 को दिया गया, जबकि कार्य पूर्ण करने की तिथि 31 जनवरी 2027 निर्धारित है। यह कार्यलोक निर्माण विभाग सेतु संभाग अंबिकापुर के अधीन कराया जा रहा है। गांव के लोगो ने बताया कि बरसात के दिनों में मुख्यलय जाने का एकमात्र रास्ता यही नाला है।

पानी में उतरने से पहले डंडे से नीचे गड्ढे और पत्थरों का अंदाजा लगाना पड़ता है। कमर तक पानी में जान जोखिम में डालकर नाला पार करना मजबूरो बन गई है। स्कूली बच्चों, महिलओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूध, सब्जी, स्कूल, अस्पताल और दवाइयां लाने के लिए ग्रामीणों को

बाइक कंधे पर उठाकर नाला पार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने के बावजूद विभाग और ठेकेदार ने निर्माण अवधि में सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की। यदि अस्थायी मार्ग या मजबूत डायवर्जन होता तो ये स्थिति नहीं बनती 

वापस लौट गई एंबुलेंस

भाजपा मंडल महामंत्री संतोष तिवारी ने विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह मौके पर पहुंचने पर पाया कि आवागमन का कई सुरक्षित रास्ता नहीं था और अप्रोच पूरी तरह बह चुका है। उन्होंने कहा कि एक बीमार मरीज को लेने राजपुर से एंबुलेंस पहुंची थी, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा। इस संबंध में सेतु विभाग के इंजीनियर से बात करने पर जल्द मरम्मत कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन देर शा तक कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होंने विभाग से तत्काल सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था और पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।समय पर पुलिया बनाया जाता तो गांव का संपर्क न टूटता। क्षेत्रवासियों ने सभी पहुंचे विभिन्न इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने और आवागमन प्रारंभ करने हेतु पर्याप्त सुरक्षा उपायों और मार्ग निर्माण मरम्मत की मांग की है।









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