बलरामपुर
(समाचारवाणी)
बलरामपुर जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम जमुआटांड़ निवासी रमेश चेरवा के 3 वर्षीय पुत्र अभीस चेरवा को बुखार था। बुधवार की शाम करीब 6 बजे वह बच्चे को लेकर ग्राम सरनाडीह निवासी झोलाछाप डॉक्टर भुलेश्वर सिंह के घर पहुंचा। यहां डॉक्टर ने बच्चे को इंजेक्शन लगाया। जब उसे घर लाया जा रहा था, रास्ते में मौत हो गई।
इस संबंध में मासूम के पिता ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि बच्चे को बुखार था। भुलेश्वर सिंह घर पर ही दवा, सुई देकर इलाज करता है, इस वजह से उसके पास लेकर गया था। यहां उसने बच्चे को इंजेक्शन लगाया। जब वह बच्चे को लेकर घर जा रहा था तो 5-10 मिनट में ही उसकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गई और घर पहुंचने से पहले बच्चे की मौत हो गई।
कोतवाली में हुई शिकायत, जाँच शुरू
झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से बच्चे की मौत की सूचना बलरामपुर कोतवाली पुलिस को दी गई। पुलिस ने गुरुवार की दोपहर पीएम पश्चात बच्चे का शव परिजन को सौंप दिया। कोतवाली प्रभारी का कहना है कि शिकायत आई है कि बिना पंजीकृत डॉक्टर द्वारा बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया है। इसमें बच्चे की मौत हो गई है, हम इसकी जांच कर रहे हैं। बलरामपुर समेत जिले के रामानुजगंज, राजपुर, शंकरगढ़, कुसमी, वाड्राफनगर में झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं।सरगुजा संभाग में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। ये विशेषज्ञ न होते हुए भी इलाज करते हैं। कई बार ऐसा इंजेक्शन या दवा इनके द्वारा दिया जाता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई नहीं की जाती है।
बारिश में गाँव में झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय
ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या और ज्यादा है। जागरुकता के अभाव में छोटी-मोटी तकलीफ होने पर ग्रामीण इन्हीं से इलाज कराते हैं। ऐसे में कई बार इनकी जान पर बन आती है। बताया जा रहा है कि बलरामपुर जिले में पिछले 3 माह में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से यह चौथी मौत का मामला है।
बलरामपुर जिले में इन नौसीखिए झोलाछाप डॉक्टरों की गलत चिकित्सा से कई लोगों की जान जा चुकी है, वहीं पिछले कुछ सालों में कुछ मेडिकल स्टोर में भी मरीज को भर्ती करने और इलाज करने के दौरान मौत होने की चर्चा रही। जिले के ग्रामीण इलाकों में कई अवैध क्लिनिक खुल गए हैं, जिन्हें शासकीय अस्पतालों का संरक्षण प्राप्त है।
इन गांव में दूसरे प्रति से आकर घूम-घूम कर गांव में प्रेक्टिस करने वाले ऐसे झोलाछाप प्रतिबंधित एंटीबायोटिक और अन्य दावों का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं,जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है इससे पहले कुछ मेडिकल स्टोर पर भी अवैध लाइव चलाने और क्लीनिक के संचालन की खबर पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन बारिश शुरू होते ही फिर ऐसे अवैध अस्पताल सक्रिय हो गए हैं।कुछ मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारी भी अपना मूल काम छोड़कर गांव-गांव में अवैध क्लीनिक खोलकर ग्रामीणों का इलाज कर रहे हैं और मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।इससे ग्रामीणों का शोषण हो रहा है और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है हर साल बारिश होते ही कई पहुंचे विभिन्न ग्रामों में झोलाछाप सक्रिय हो जाते हैं और मौसमी बीमारियों का इलाज कर मालामाल होते हैं कई ऐसे झोलाछाप जेनेरिक दवा लेकर उसे काफी अधिक दामों पर मरीजों को बेचते हैं, वहीं कुछ ग्रामों में स्वास्थ्य केंद्र में मिलने वाली निशुल्क दवाएं भी पैसा लेकर बेचे जाने की खबर चर्चा में है।
पिछले कुछ अरसे से बलरामपुर जिले के दूरदराज क्षेत्रों में अवैध क्लिनिक चलाना और बैग लेकर गांव में सुई, ड्रिप पट्टी करना एक प्रमुख व्यवसाय बन चुका है और कई म्यूट को दबा दिया जाता है।कुछ ग्राम में झोलाछाप डॉक्टरों ने अपना-अपना गांव बांट लिया है और सुबह-सुबह झोला बैग में दबे लेकर घर-घर जाकर मरीजों का उपचार कर लवाना फीस वसूलते हैं।कुछ रिटायर्ड कर्मचारी भी बलरामपुर जिले में अपनी दुकान खोलकर मरीज को भरती कर रहे हैं,और इसमें एक बड़े नेटवर्क के शामिल होने और स्वास्थ्य से खिलवाड़ की खबरें चर्चा में है।


