दशहरा पर सजा रघुनाथ पैलेस, सरगुजा महाराजा श्री टी एस. सिंह देव एवं युवराज आदितेश्वर सिंह देव से मिले सरगुजा वासी, रियासतकालीन परंपरा का हुआ निर्वहन

दशहरा पर सजा रघुनाथ पैलेस, सरगुजा महाराजा श्री टी एस. सिंह देव एवं युवराज आदितेश्वर सिंह देव से मिले सरगुजा वासी, रियासतकालीन परंपरा का हुआ निर्वहन

samacharvani.com
0




सरगुजा। अंबिकापुर 

(समाचारवाणी) 

 सरगुजा राज परिवार द्वारा आज भी पारंपरिक रूप से दशहरा पर्व पर रियासत काल से चली आ रही है। परंपराओं का निर्वहन होता है और  सरगुजा पैलेस में आम जनता सरगुजा महाराज एवं युवराज से मिलकर सम्मान, परंपरा और दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

आज 20 अक्टूबर 2026,मंगलवार को दशहरा पर्व पर सरगुजा राजपरिवार के मुखिया एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव एवं उनके उत्तराधिकारी भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने पारंपरिक फाटक पूजा, शस्त्र पूजा, नगाड़ा पूजा, अश्व एवं गज पूजा, ध्वज पूजा,धर्मों एवं बैगाओं के पूजन किए।




सरगुजा पैलेस के दशहरा उत्सव में होता है शस्त्र व नगाड़ा पूजन

 सरगुजा रियासत का परंपरागत दशहरा उत्सव प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। सरगुजा पैलेस में दशहरा की शुरुआत नवमीं तिथि पर होने वाली कुल देवी मां महामाया की पूजा अर्चना से शुरू हुई। मंगलवार को दशमी तिथि लगने पर सरगुजा राजपरिवार के मुखिया एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव एवं उनके उत्तराधिकारी भतीजे  आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने पारंपरिक फाटक पूजा, शस्त्र पूजा, नगाड़ा पूजा, अश्व एवं गज पूजा, ध्वज पूजा सहित विभिन्ना धर्मों एवं बैगाओं के पूजन के पश्चात रघुनाथ पैलेस में बने कचहरी के गद्दी में विराजमान हो दशहरा की सभी को बधाई दी। आज मंगलवार 20अक्टूबर को दोपहर 3.30 बजे से आमजनों हेतु रघुनाथ पैलेस को खोला गया , जहां महाराजा टीएस सिंहदेव, राजा अरुणेशवर शरण सिंह देव,एवं भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने आमजनों से मुलाकात किया । दशहरा का यह पारंपरिक उत्सव सदियों से रघुनाथ पैलेस सरगुजा में मनाया जाता है जिसमें महाराजा कचहरी में दरबार लगाते हैं और फिर अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों से मुलाकात करते हैं। पुरानी परंपरा अनुसार राजपरिवार से जुड़े लोग इस अवसर पर महाराजा को नजराना भेंट कर दशहरा की बधाई देते हैं तथा क्षेत्र के रक्षा का संकल्प लेते हैं। दशहरा पर रघुनाथ पैलेस सरगुजा में सरगुजा संभाग के अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

दशहरा में पूर्व में हाथी पर नगर में प्रोसेशन निकलती थी, जिसमें काफी संख्या में हाथी सम्मिलित होते थे और राजा हाथी पर बैठ कर पहले बिलासपुर रोड स्थित बंजारी मठ जाकर नीलकंठ की पूजा करते थे और तत्पश्चात इमलीपारा में स्थित गद्दी की पूजा पश्चात आमजनों से मुलाकात करते थे। हाथी पर निकलने वाला जुलूस 1967-68 के आसपास बंद हो गया और तब से अब तक बंद है किंतु अन्य परंपराओं का निर्वहन पूरे उत्साह से किया जाता है।










@surendra 

(Samachar vani news desk ambikapur) 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)