गांधी सुमिरन , महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित

गांधी सुमिरन , महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित

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  • महात्मा गांधी की 76 वीं पुण्यतिथि पर रेहाना फाउंडेशन ने आयोजित किया गांधी सुमिरन।
कार्यक्रम में देश के  वैज्ञानिक,समाजसेवी और शायर प्रोफेसर गौहर रजा शामिल हुए। उन्होंने वैज्ञानिक चेतना, संविधान, और आज विषय पर अपनी बातचीत रखी।



 अंबिकापुर (सरगुजा)

समाचारवाणी  

नगर की समाजसेवी संस्था रेहाना फाउंडेशन ने शहर में अपना कार्यक्रम गांधी सुमिरन आयोजित किया। इस कार्यक्रम में देश के  वैज्ञानिक,समाजसेवी और शायर प्रोफेसर गौहर रजा शामिल हुए। उन्होंने वैज्ञानिक चेतना, संविधान, और आज विषय पर अपनी बातचीत रखी। वैज्ञानिक चेतना पर बातचीत करते हुए उन्होंने साइंटिफिक टाइम पर की बात की और बताया कि समाज में वैज्ञानिक चेतना हमेशा से रही है ,और इसी से समाज का विकास संभव है। गांधी तक आते-आते तार्किकता और अहिंसा जुड़ती चली गई है। वर्गवाद ,जातिवाद का ढांचा हुआ बल्कि समय उससे मुक्त ना हो सका। भारत में तार्किकता के साथ-साथ वैज्ञानिक चेतना भी फैली। वैज्ञानिकों में भी स्वतंत्रता संग्राम की चेतना थी।

 इसी पर आगे बातचीत करते हुए गौहर रजा ने कहा कि नेहरू ने कहा है कि वैज्ञानिक मिजाज़ होना आजाद आदमी की पहचान है ,और यह बात नेहरू ही कह सकते थे ।यानी सोच का आज़ाद होना जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिकों की, और वैज्ञानिक सोच की चर्चा करते हुए बताया कि आज का जो यह दिन है वह गांधी से जुड़ा दिन है। और वैश्विक तौर पर गांधी भी वैज्ञानिक तरीके और तकनीक के धमाल के बड़े प्रशंसक रहे, और आइंस्टीन भी गांधी के बड़े प्रशंसक रहे। गांधी एक धर्म व सामाजिक विज्ञान और राजनीति में भी निरंतर प्रयोग और बदलाव को तरजीह देते थे। उन्होंने विज्ञान और उसके विकास पर पुरजोर बल दिया ।

आगे की बातचीत करते हुए उन्होंने कहा जब अंग्रेज आए थे और जब 47 में गए तब के हालात में सबसे बड़ा अंतर यह था कि देश को पूरी तरह से निचोड़ कर कंगाल कर चुके थे। पर हमने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया और देश को तरक्की के रास्ते पर डाला। आगे एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जिनको विज्ञान पर आपत्ति है उन्हें तकनीक पर एतराज नहीं है । कहने का गरज यह की विज्ञान विरोधी होकर भी तकनीक का अपने पक्ष में इस्तेमाल किया जा सकता है, और किया जा रहा है।

 वैज्ञानिक चेतना पब्लिक लाइफ में होना चाहिए। बच्चों के साथ-साथ  आम लोगों के बीच भी काम करना चाहिए। यह बेहद आवश्यक है। प्रोफेसर गौहर रजा वैज्ञानिक होने के साथ-साथ देश के प्रमुख शायर भी माने जाते हैं। कार्यक्रम की अगली कड़ी में उन्होंने अपनी कई नज्में भी सुनाई जिसे श्रोता मंत्र मुग्ध होकर सुनते रहे। श्रोताओं ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया, और समाज के विकास को गति देने के लिए चल रहे इस आयोजन की बहुत सराहना की। 

कार्यक्रम का आरंभ संस्था के दिनेश शर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन विशाल श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का संचालन रचनाकार महेश वर्मा ने किया। कार्यक्रम का संयोजन रेहाना फाउंडेशन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता जावेद कर रहे थे। उक्त कार्यक्रम में नगर के साहित्यकार तपन बनर्जी,विजय गुप्त, प्रभु नारायण वर्मा ,प्रितपाल सिंह अरोरा, वेद प्रकाश अग्रवाल, मुकुल रंजन गोयल,  त्रिभुवन सिंह , रमेश द्विवेदी,रणविजय सिंह तोमर , कांत दुबे , अमलेंदु मिश्र, मनीष कुमार,कृष्णानंद तिवारी, अंजनी कुमार पांडेय,अफरोज खान, मनीष तिवारी, आशीष शर्मा ,अनामिका चक्रवर्ती, कामिनी तिवारी,प्रवीण सिंह , शाहिद खान ,प्रकाश कुमार, हर्षवर्धन ,केवल साहू इत्यादि के साथ बड़ी  संख्या में श्रोता मौजूद रहे।


                आयोजन के वीडियो और तस्वीरें 


(Surendra tiwari @ Samachar Vani news)






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