हाथी प्रभावित क्षेत्र के पांच स्कूल में छुट्टी घोषित

हाथी प्रभावित क्षेत्र के पांच स्कूल में छुट्टी घोषित

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हाथियों से ग्रामीणों को दूर रखने जिला प्रशासन कर रहा इंतज़ाम 



 बलरामपुर (समाचारवाणी)

पिछले कुछ समय से बलरामपुर जिले में हाथियों के बढ़ते आतंक को देखते हुए शिक्षा विभाग द्वारा ग्राम पंचायत ककनेसा व आसपास के अन्य ग्रामों में स्थित 5 स्कूलों में पढ़ाई को स्थगित कर इन स्कूलों में छुट्टी कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर ने हाथियों के आमद रफ्त को देखते हुए स्कूली बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए यह निर्णय लिया है।

विदित हो कि बलरामपुर जिले में लम्बे समय से हाथियों का दल उत्पात मचा रहा है। जिले के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र के कई गांवों में हाथियों ने ग्रामीणों की फसलों व घरों को जमकर नुकसान पहुंचाया है। वर्तमान में हाथियों का दल विकासखंड के ग्राम ककनेशा के पास बागीबेहरा प्लांटेशन में डटा हुआ है। इस दल में तीन हाथी हैं जिसमें एक शावक है ।बीती रात इन तीनों हाथियों ने तीन ग्रामीणों के घरों को तोड़ते हुए गेंहू की फसल को भी नुकसान पहुचाया है, जिससे ग्रामीणों में हाथियों को लेकर भय व्याप्त है।

हाथियों के भय से रतजगा कर रहे ग्रामीण 

वाड्राफनगर के तीन ग्रामों में हाथियों द्वारा घर तोड़े जाने के बाद वन हमला सतर्क हो गया है, और निगरानी दल इन जंगली हाथियों के विचरण पर नजर बनाए हुए है। वनमंडलाधिकारी बलरामपुर के निर्देश पर वाड्रफनगर रेंज के समस्त हाथी मित्र और निगरानी दल के सदस्य हाथियों को सुरक्षित इलाके से निकलने के लिए प्रयासरत हैं। इस बीच हाथी मानव संघर्ष की नई कहानियां सामने आ रही हैं । वाडरफनगर के जंगली इलाके के ग्रामीण ठंड भरी रात में अलाव के सहारे रतजगा कर रहे हैं और मशाल टॉर्च के सहारे हाथियों को गांव से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। 

खतरे से आगाह वनपुत्रों ने बदला आशियाना

 आने वाले दिनों में जंगल के किनारे रहने वाले वनपुत्र पहाड़ी कोरवा, कोडाकू, पण्डो जनजातियों को हाथियों से कोई नुकसान ना हो, इसके लिए जिला प्रशासन खास इंतजाम कर रहा है। विभाग द्वारा मुनादी करा कर ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की संदेश भी दिया जा रहा है।  इधर जंगलों में रहने वाले अति पिछड़ी जनजाति के कुछ पहाड़ी कोरवा, पण्डो और कोड़ाकु अपने कुनबे को हाथियों से दूर रखने के लिए ,और अपने जानमाल की सुरक्षा के लिए आशियाना बदल रहे हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र से कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर अपना ठिकाना बना चुके हैं,और ग्रामीण इलाके में हाथियों के आवागमन वाले संभावित मार्गों पर प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है।



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