सरगुजा अंचल का लोक पर्व, करमा

सरगुजा अंचल का लोक पर्व, करमा

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सरगुजा संभाग की समृद्ध आदिवासी संस्कृति का परचम लहराता लोक परब करमा के पारम्परिक आयोजन में रंगा सरगुजा..




अंबिकापुर (सरगुजा)

समाचारवाणी 

 लोक पर्व न सिर्फ हमारी परंपरा का जरूरी हिस्सा हैं,बल्कि जीवन जीने की कला भी हैं ! मेहनत के बाद थके-हारे मन को आराम के साथ-साथ मनोरंजन भी चाहिए, वह भी ऐसा जो उसे अगले काम के लिए जोश और उमंग भर दे ! आंचलिक जीवन की तमाम झलकियां जीवन की कठिनाइयों के बीच सादगी और सरलता को अपनाकर खुशी महसूस कर पाने की जरूरत पर जोर देती है।

सरगुजा अंचल में लोक पर्वों की शुरूआत वर्षा ऋतु से होती है। यहाँ का लोक प्रसिद्ध पर्व करमा है। करमा, भादों मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को हर्षपूर्वक मनाया जाता है।

 करमा पर्व के दिन, रात भर मांदर की थापों के साथ लोक गीत गाकर करमा नृत्य किया जाता है। करमा सरगुजा संभाग के आदिवासियों का महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस त्यौहार में गांव के मुखिया के आँगन में कर्मदेवती वृक्ष की डाली (डार) गाड़कर गांव का बैगा पूजा करवाता है। लोगों की मान्यता है कि कर्मदेवती वृक्ष पर कर्मदेव निवास करते हैं, इसलिए इस वृक्ष की पूजा करते हैं।

एक सप्ताह पूर्व गांव की सभी स्त्रियाँ बांस की टोकरी, डेलवां में मक्का, धान, उड़द इत्यादि का जाँई (पौधा) लगाती हैं 

 इस जाँई को अंधेरे में रखते हैं ताकि पौधा पीला हो जाये। करमा पर्व के दिन जाँई में हल्दी लगाकर इसके मध्य खीरा रख कर करम डार के नीचे रखा जाता है।

 सरगुजिहा संस्कृति में करमा लोक पर्व आज भी पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। ये हमारे लोक जीवन, परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है।गांव-गांव में करमा पर्व की उत्साह होती है और स्थानीय हाट बाजारों में करमा गाने के साथ बजाए जाने वाला वाद्य यंत्र मांदर की बिक्री भी तेज हो जाती है। इस अवसर पर अंबिकापुर का इतवारी बाजार भी मांदर बिक्री करने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।





    सरगुजा अंचल के प्रमुख लोक पर्व,करमा परब की कुछ          जीवंत तस्वीरें..






     Samachar vani news desk, ambikapur 

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