सरगुजा पैलेस में हुई दशहरा पूजा, महल में महाराजा से मिलने पहुंचें आम नागरिक

सरगुजा पैलेस में हुई दशहरा पूजा, महल में महाराजा से मिलने पहुंचें आम नागरिक

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अंबिकापुर (सरगुजा)

समाचारवाणी 

सरगुजा राजपरिवार ने हर साल की तरह शारदीय नवरात्रि, और दशहरा के अवसर पर फाटक, अश्व, गज, शस्त्र, नगाड़ा, नवग्रह, ध्वज, निशान सहित अन्य पूजा परंपरानुसार किया। राजपरिवार के मुखिया और प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव सहित उनके उत्तराधिकारी आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने विधिविधान से पूजा अर्चना की।

दशहरा का पर्व रियासत के प्रति मान्यता का एक प्रतीक है। यह परम्परा सरगुजा में कई दशकों से चली आ रही है। दशहरा के अवसर पर आज शनिवार को पैलेस आम लोगों के लिए खुला रहा और अमजनों ने राजपरिवार से भेंट की ।



हजारों की संख्या में पहुंचते हैं लोग

दशहरा के पर्व पर अब भी लोग हजारों की संख्या में सरगुजा पैलेस पहुंचते हैं और सरगुजा राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंहदेव, उनके छोटे भाई राजा अरूणेश्वर शरण सिंहदेव और आदित्येश्वर शरण सिंहदेव से मुलाकात करते हैं। राजपरिवार से जुड़े लोग और आमजन राजा के प्रति अपना विश्वास प्रकट करते हैं।

आज भी पुरानी परंपरा को मान्यता

परंपरा है कि जब संधि पूजा कर महाराजा-राजा पैलेस लौटते हैं तो सर्वप्रथम क्षेत्र के आदिवासी वर्ग से जुड़े लोग जिन्हें हम अपना रक्षक मानते हैं। वे जब सिंह दरवाजा अर्थात् फाटक पूजा करते हैं और फाटक खोल कर अंदर प्रवेश हेतु आमंत्रित करते हैं। तभी पैलेस में प्रवेश मिलता है, इसके पहले नौबत खाना की पूजा होती है।दशहरा पर क्षेत्र की रक्षा-सुरक्षा के लिए हाथी-घोड़े, अश्व गज की पूजा राजा के सेना और शक्ति के प्रतीक के रूप में की जाती है। शस्त्र पूजा उपरांत नगाड़ा पूजा और निशान पूजा सहित अन्य परंपरानुसार पूजा की जाती है।टीएस सिंहदेव ने आज दशहरा पर्व पर सरगुजा संभाग सहित प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

रियासतकाल में निकलता था भव्य जुलूस

 रियासतकाल में दशहरा के अवसर पर जुलूस के साथ हाथी पर सवार होकर राजपरिवार के मुखिया निकलते थे। इसमें काफी संख्या में हाथी सम्मिलित होते थे। राजा हाथी पर बैठ कर पहले बिलासपुर रोड स्थित बंजारी मठ जाकर नीलकंठ की पूजा करते थे।इमलीपारा में स्थित गद्दी की पूजा और आमजनों से मुलाकात करते थे। हाथी पर निकलने वाला जुलूस 1967-68 तक चला था। अन्य परंपराओं का निर्वहन पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार चल रही है।




(Samachar vani news desk, ambikapur)



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