हाथियों ने पीछा कर रहे पहाड़ी कोरवा को कुचला, शराबी कोरवा की हुई मौत

हाथियों ने पीछा कर रहे पहाड़ी कोरवा को कुचला, शराबी कोरवा की हुई मौत

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पस्ता (राजपुर)

(समाचारवाणी) 

 राजपुर वन  परिक्षत्र के  पस्ता इलाके में चिलमा कला पहाड़ी कोरवा बस्ती है।  नदी किनारे लगी नर्सरी में बीती रात हाथी पहुँच गए। यहीं के जंगल में गहनाडांड निवासी शराब में धुत्त हाथी भगाने गए 60 वर्षीय पहाड़ी कोरवा गज़दल के चपेट में आ गया,जिसे आठ हाथियों ने घेरकर मार डाला। परिवार के लोग किसी तरह जान बचाकर भागे।

पस्ता से सटे ग्राम गहनाडांड़ निवासी 60 वर्षीय चमरा पिता लोया पहाड़ी बीती रात्रि अपने सहयोगियों के साथ शराब के नशे में धुत होकर हाथी भगाने गया हुआ था। साथ में गए सहयोगी व वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने मना भी किया मगर नही माना। चिलमा नर्सरी कक्ष क्रमांक पी. 2804 में चमरा पहाड़ी का हाथियों से सामना हो गया हाथियों ने कुचलकर मार डाला। मौके पर उप वन मंडलाधिकारी आरएसएल श्रीवास्तव, वन परिक्षेत्राधिकारी महाजन लाल साहू सहित वन विभाग के कर्मचारी पहुंचे।ज्ञातव्य है कि आठ हाथियों का दल 8 नवंबर से पहुंचकर बासेन सर्किल के जंगल में विचरण कर रहा है, वही सुरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से 35 हाथियों का दल तीन दिन पहले चाची सर्किल के जंगल में पहुंचकर वर्तमान में बरियों सर्किल के जंगल मे विचरण कर रहा है।



 वन विभाग ने इसकी सूचना डीएफओ अशोक तिवारी को दी थी। सूचना उपरांत मौके पर फॉरेस्ट एसडीओ रवि श्रीवास्तव, रेंजर महाजन साहू वन कर्मचारियों के साथ पहुंचकर आसपास के गांव में जन चौपाल लगाकर ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की समझाइश दी थी। वही वन विभाग के द्वारा ग्रामीणों को पंपलेट प्रदान कर गांव-गांव में हाथी मित्र दल वाहन से लाउडस्पीकर से मुनादी कर हाथियों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं।

परिजनों को मिली सहायता राशि 

 मृतक पहाड़ी कोरवा के परिजनों को आज वन विभाग द्वारा तात्कालिक सहायता राशि ₹25000 प्रदान किया गया राजपुर रेंज ऑफिसर महाजन साहू द्वारा तत्काल आश्रितों को सहायता राशि प्रदान की गई।



पक चुकी फसलों को बचाने परेशान किसान 

 बलरामपुर जिले के सेमरसोत, पस्ता,राजपुर बरियों इलाके में एक साथ 43 हाथियों के आवागमन से पूरा वन क्षेत्र सहमा हुआ है।इस समय मक्का की फसल कट कर खलिहान में आ चुकी है।खेतों में धान की फसल लहलहा रही है। कुछ जगह धान की कटाई कर खलिहान में रखे गए हैं।इधर गन्ना और सब्जी की फसल भी खेतों में तैयार है।इन दिनों किसान बड़े पैमाने पर टमाटर, बैगन,खीरा,मिर्च, गोभी की सब्जी खेतों में लगाते हैं जिससे बाहर की मंडियो में भेजा जाता है।पिछले कुछ सालों में बलरामपुर जिले के किसान, उद्यानिकी की फसलों को लेकर काफी आर्थिक लाभ मिल रहा है। हाथियों के क्षेत्र में विचरण से धान के साथ अपनी फसलों सब्जियों को बचाने के लिए किसान एकजुट होकर पटाखा, मशाल,और टॉर्च के सहारे हाथियों को अपने गांव के सरहद से बाहर रखने का प्रयास कर रहे हैं।इधर भूख से व्याकुल हाथियों का दल खेतों में धान,सब्जी मक्का और गन्ने की फसल को निशाना बना रहे हैं। इसके कारण हाथी मानव संघर्ष बढ़ता जा रहा है।बीती रात हाथियों को भगाने से आक्रोशित गज दल ने इस कोरवा युवा को अपने चपेट में ले लिया गांव-गांव में रात्रि जागरण कर किसान अपने खेतों से दूर रखने के लिए हाथियों के पीछे-पीछे तेज आवाज करते हैं, इससे हाथी आक्रोशित होकर हमला कर रहे हैं।

  -S. Tiwari 





शंकरगढ़ टीम ने अभियान चलाकर एक रात में सीमा से बाहर किया हाथी 

शंकरगढ़ की सीमा में राजपुर सरहद के करवां, कुंदी, उलिया उफिया, की ओर से गजदल जगिमा, पटना, अर्जुनगढ़ जंगल पहुंचा। रास्ते में 12 किसान की फसत नुकसान के बाद एक कच्चा मकान तोड़कर धान खा गया। संभावित नुकसान से रोकने रेंज ऑफिसर अखिलेश जायसवाल ने हाथी मित्र दल, निगरानी दल के स्टॉफ के साथ रात भर अभियान चलाकर शंकरगढ़ सीमा से बाहर बासेन सर्किल की ओर सुरक्षित निकासी कराई।आज भी रेंजर के नेतृत्व में वन अमला हाथियों से निगरानी में जुटा है।हाथियों को रेंज से निकालने के अभियान में रेंज ऑफिसर अखिलेश कुमार जायसवाल, राम प्रताप राही, प्रमोद गुप्ता,लक्षमण राम,करमु राम, दीवान,चंद्रदेव,युधिष्टिर,नगीने, अनिल एवं समस्त स्टॉफ शंकरगढ़ सक्रिय रहे।



(Samachar vani news,Ambikapur) 





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