अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण मार्च से, फुट ओवर ब्रिज, डिजिटल डिस्प्ले का कार्यादेश जारी, जन औषधि केंद्र को भी मंजूरी

अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण मार्च से, फुट ओवर ब्रिज, डिजिटल डिस्प्ले का कार्यादेश जारी, जन औषधि केंद्र को भी मंजूरी

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 अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण मार्च से होगी शुरू.क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य श्री मुकेश तिवारी की मांग पर रेलवे ने लिया संज्ञान, जल्द ही यात्रियों को मिलेंगी सुविधाएं..



अंबिकापुर 

(समाचारवाणी) 

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (ZRUCC) की बिलासपुर में आयोजित 21वीं बैठक में सरगुजा क्षेत्र से जुड़े रेलवे विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई और रेलवे स्टेशन से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

                क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य मुकेश तिवारी ने बताया कि अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण का कार्य मार्च माह से प्रारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही स्टेशन में 20 फीट चौड़े (6 मीटर) फुट ओवर ब्रिज तथा डिजिटल कोच डिस्प्ले प्रणाली की स्थापना के लिए कार्यादेश जारी कर दिए गए हैं। रेलवे स्टेशन में एक अतिरिक्त मार्ग विकसित करने की संभाव्यता को लेकर परीक्षण कराया जा रहा है। वहीं, अंबिकापुर स्टेशन परिसर में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र प्रारंभ करने के लिए रेलवे महाप्रबंधक द्वारा अनुमोदन भी प्रदान कर दिया गया है।



 बिलासपुर रेलवे के ज़ोनल कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस बैठक में अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण की स्वीकृति, टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी होने के बावजूद अभी तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किए जाने पर आक्रोश व्यक्त किया गया । इस मुद्दे को उठाते हुए जेडआरयूसीसी सदस्य मुकेश तिवारी ने कहा कि अतिरिक्त प्लेटफार्म की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण ट्रेन परिचालन में निरंतर असुविधा हो रही है और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य को पूर्ण करने के लिए निर्धारित समयावधि का लगभग आधा समय बीत चुका है, इसके बावजूद कार्य प्रारंभ न होना प्रशासनिक उदासीनता और यात्रियों के प्रति अन्यायपूर्ण रवैया दर्शाता है।



उन्होंने कहा कि सरगुजा संभाग मुख्यालय का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन होने के बावजूद अंबिकापुर में यात्री सुविधाओं का पर्याप्त सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया है, जबकि यहां यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रेलवे प्रबंधन द्वारा अवगत कराया गया कि अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण प्रारंभ करने के लिए अंबिकापुर में स्थित गुड्स शेड के कार्य को 1 मार्च से डिनोटिफाइड कर दिया गया है, जिसके बाद यह क्षेत्र अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण के लिए उपलब्ध हो जाएगा।  बैठक में जोनल कमेटी के सदस्य मुकेश तिवारी ने निर्धारित मापदंडों के अनुरूप समयबद्धता के साथ निर्माण कार्य पूर्ण करने को कहा । बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 6 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज तथा डिजिटल कोच डिस्प्ले प्रणाली की स्थापना हेतु आदेश जारी कर दिए गए हैं।

पिट लाइन निर्माण कार्य को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। जेडआरयूसीसी सदस्य द्वारा पिट लाइन कार्य को तेज गति से पूर्ण किए जाने की मांग पर रेलवे प्रशासन ने चालू वित्तीय वर्ष के भीतर इस कार्य को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। वहीं स्टेशन तक पश्चिम दिशा से पृथक पहुंच मार्ग की मांग पर रेलवे ने बताया कि इस संबंध में राज्य शासन के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर इसकी संभाव्यता का परीक्षण कराया जाएगा। प्रस्ताव यदि तकनीकी, भूमि उपलब्धता एवं यातायात दृष्टि से व्यवहार्य पाया जाता है तो नियमानुसार इसके निर्माण की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में यह भी बताया गया कि अंबिकापुर रेलवे स्टेशन में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र प्रारंभ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

नई ट्रेन के संचालन का प्रस्ताव

जेडआरयूसीसी सदस्य मुकेश तिवारी ने बैठक में कहा कि अंबिकापुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए अब यह आवश्यक और व्यावहारिक हो गया है कि अंबिकापुर से रायपुर के लिए एक सीधी इंटरसिटी ट्रेन प्रतिदिन प्रातः 4 बजे प्रारंभ की जाए, जो अधिकतम 11 बजे तक अपनी यात्रा पूर्ण कर यात्रियों को रायपुर पहुंचा सके। उन्होंने सुझाव दिया कि इस ट्रेन की वापसी रायपुर से शाम 4 बजे हो और यह रात्रि 11 बजे तक अंबिकापुर पहुंचे। बैठक में रेलवे प्रशासन ने इस सुझाव को संज्ञान में लेने की जानकारी दी।

पार्किंग अव्यवस्था पर कार्रवाई, पार्किंग टेंडर निरस्त

रेलवे स्टेशन परिसर में पार्किंग को लेकर हो रही असुविधाओं, मनमानी शुल्क वसूली, पिक-एंड-ड्रॉप यात्रियों से जबरन शुल्क वसूले जाने तथा पार्किंग स्थल पर सार्वजनिक रूप से शुल्क सूची प्रदर्शित न किए जाने की शिकायतों पर रेलवे प्रशासन ने जांच कराई। जांच में शिकायतें सही पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर दिया गया है। जल्द ही नई निविदा IREPS मॉड्यूल के माध्यम से आमंत्रित कर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

बैठक में यह भी बताया गया कि पार्किंग एवं नो-पार्किंग क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा तथा बैरिकेडिंग और बल तैनाती के माध्यम से यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास प्रारंभ किया जा रहा है। शीघ्र ही ड्रॉप-एंड-गो के लिए संकेतक लगाए जाएंगे। इसके साथ ही स्वीकृत पार्किंग शुल्क सूची को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना और प्रत्येक भुगतान पर अधिकृत रसीद देना अनिवार्य किया जा रहा है।

नई रेल परियोजनाओं की स्थिति

नागपुर–चिरमिरी रेलवे ट्रैक के शीघ्र निर्माण प्रारंभ किए जाने की मुकेश तिवारी की मांग पर रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस परियोजना के लिए कुल 107.906 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसमें 15.5 हेक्टेयर निजी भूमि, 7.685 हेक्टेयर शासकीय भूमि, 13.433 हेक्टेयर राजस्व वन भूमि तथा 71.288 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि सम्मिलित है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार के साथ संपादित की जा रही है। भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई पूर्ण होने के उपरांत निर्माण कार्य के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी।

अंबिकापुर से सूरजपुर के बीच लाइन दोहरीकरण कार्य जल्द शुरू करने के मामले में बताया गया कि इस रेलखंड के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और सर्वे कार्य के आधार पर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) की प्रक्रिया प्रगतिशील है।

नर्मदा एक्सप्रेस में कोच उन्नयन

जेडआरयूसीसी सदस्य मुकेश तिवारी की मांग पर नर्मदा एक्सप्रेस (18233/18234) में आईसीएफ कोच के स्थान पर मार्च माह से एलएचबी कोच लगाए जाने को भी मंजूरी प्रदान की गई है। इसके साथ ही शहडोल–नागपुर ट्रेन का अंबिकापुर से परिचालन किए जाने के संबंध में मध्य रेलवे को अवगत कराने तथा अंबिकापुर–निजामुद्दीन ट्रेन को सप्ताह में दो बार चलाने से संबंधित प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को प्रेषित करने की जानकारी दी गई।

रेल लाइन विस्तार पर जोर

अंबिकापुर से आगे रेल लाइन विस्तार को लेकर जेडआरयूसीसी सदस्य ने अंबिकापुर–रेणुकूट एवं अंबिकापुर–कोरबा रेल लाइन को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि अधिकांश रेलवे लाइनों का विस्तार कोयला परिवहन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, इसलिए कम से कम अंबिकापुर–रेणुकूट रेल मार्ग का निर्माण मुख्यतः यात्री सेवा और जन सुविधा के उद्देश्य से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के निर्माण से कोल परिवहन, यात्री सुविधा और रेलवे की आय—तीनों उद्देश्यों की पूर्ति होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अंबिकापुर–रेणुकूट रेल मार्ग के निर्माण से वर्ष 1947 से लंबित ईस्ट इंडियन रेलवे का प्रोजेक्ट नंबर–117, जिसके अंतर्गत सरगुजा को सिंगरौली, रीवा होते हुए मानिकपुर से जोड़ने की परिकल्पना की गई थी, उसे भी धरातल पर उतारा जा सकता है। साथ ही इससे ओडिशा सरकार की पूरी से प्रयागराज को अंबिकापुर के माध्यम से जोड़ने और कम दूरी में दिल्ली पहुंचने की मांग भी साकार हो सकेगी।

इस बैठक में दुर्ग सांसद विजय बघेल, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, रेलवे महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, तथा बिलासपुर, रायपुर और नागपुर मंडल के डीआरएम सहित महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य उपस्थित रहे।



बिलासपुर में बैठक को सम्बोधित करते हुए श्री मुकेश तिवारी 



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