संत हरकेवल एवं सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में व्यवहार परिवर्तन व माहवारी स्वच्छता प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

संत हरकेवल एवं सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में व्यवहार परिवर्तन व माहवारी स्वच्छता प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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अंबिकापुर 

(समाचारवाणी) 

अम्बिकापुर के संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय एवं सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय अम्बिकापुर में सरगुजा साइंस ग्रुप एज्युकेशन सोसायटी व छत्तीसगढ़ एलायंस फॉर बिहेवियर चेंज ने प्रशिक्षार्थियों के माध्यम से स्थानीय समाज में स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन एवं व्यवहार परिवर्तन पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान व्यवहार परिवर्तन को लेकर छोटे-छोटे विषयों पर सार्थक चर्चा कर उसे अपने दैनिक जीवन में उपयोग में लाते हुए स्वास्थ्य एवं पोषण को बेहतर बनाने की दिशा में सार्थक चर्चा हुई।



सरगुजा साइंस ग्रुप के संस्थापक अंचल ओझा द्वारा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने माहवारी स्वच्छता प्रबन्धन सहित हाथ धोने की सही प्रक्रिया, स्वच्छता बनाए रखने के उपाय एवं संतुलित आहार के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने माहवारी के दौरान अस्वच्छता के कारण, सही साफ सफाई नहीं रखने के कारण होने वाले कई संक्रमित बीमारी का उदाहरण देते हुए संक्रमण के कारण शरीर पर क्या प्रभाव आते हैं क्या परिवर्तन महसूस होता है जैसे विषयों पर खुली चर्चा करते हुए बीएड के प्रशिक्षार्थियों से बात की। 




उन्होंने कहा कि आप शिक्षक बनने की ओर अग्रसर हैं, आप भविष्य निर्माता हैं आप पर यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि आप समाज में अपने विद्यालय में छात्राओं को इसकी जानकारी दें। 

संस्था प्रमुख अंचल ओझा ने माहवारी के दौरान विशेष सावधानियों पर जोर देते हुए बताया कि प्रत्येक 3–4 घंटे में सेनेटरी पैड अथवा सूती के कपड़े के पैड बदलना आवश्यक है, जिससे किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचा जा सके। उन्होंने इस विषय पर सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा किये जा रहे प्रयास की भी जानकारी दी तथा कार्यस्थल पर सैनेटरी पैड के वेंडिंग मशीन व इंसीनरेटर मशीन लगाए जाने की उपयोगिता भी बताई। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अपनाकर ही हम अनेक बीमारियों से बच सकते हैं और समाज को स्वस्थ बना सकते हैं।

इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं भगवान गणेश के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्वागत गीत के माध्यम से हार्दिक स्वागत किया गया।कार्यक्रम के प्रथम चरण में समाजसेवी सुल्ताना सिद्दीकी ने अपने अनुभव साझा करते हुए विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में माहवारी संबंधी जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माहवारी एक प्राकृतिक एवं महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके प्रति समाज में सही जानकारी एवं सकारात्मक दृष्टिकोण होना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए शहनाज जहां ने बताया कि माहवारी कोई शर्म की बात नहीं है यह सृष्टि एवं संरचना का आधार है इसलिए इस विषय पर हम सभी को खुलकर बात करना चाहिए ।

कार्यक्रम की अंतिम चरण में संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. पूजा दुबे द्वारा माहवारी से संबंधित वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यपरक जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को जागरूक करते हुए कहा कि इस विषय पर खुलकर चर्चा करना एवं सही जानकारी प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ रहें और दूसरों को भी जागरूक कर स्वस्थ रहने में अपना योगदान दे सकें। वहीं सरस्वती बीएड कॉलेज की प्राचार्य डॉ श्रद्धा मिश्रा ने कहा कि हमे समाज में जागरूकता लाने के लिए पूरे गांव या शहर को टारगेट करने की जरूरत नहीं है, यदि हम सब केवल एक परिवार के साथ कार्य करें और एक परिवार में बदलाव लाने में कामयाब हो जायें तो धीरे-धीरे यह समाज बदल जायेगा, पहले स्वयं व परिवार को और इसके बाद केवल एक परिवार को बदलने पर कार्य करने की जरूरत है। 

समस्त कार्यक्रम में संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्या डॉ. पूजा दुबे के मार्गदर्शन तथा सहायक प्राध्यापक सुमन पांडेय, रानी पांडेय, चंदा सिंह, नीरू त्रिपाठी एवं श्वेता तिवारी सहित सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय के समस्त महाविद्यालय परिवार के सहयोग, निर्देशन और निरीक्षण में संपन्न हुआ। जिसमें बी.एड के प्रशिक्षार्थियों के सक्रिय भागीदारी रही।"महावारी शर्म का विषय नहीं बल्कि सृष्टि का संचालक है, मातृत्व का आधार है " के नारे के साथ कार्यक्रम को समाप्त किया गया।

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