अंबिकापुर
(समाचारवाणी)
बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र के बरियों के पास स्थित भिलाई खुर्द इलाके में संचालित एक गिट्टी क्रेशर प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे में आदिवासी मजदूर की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासनिक व्यवस्था, श्रम कानूनों के पालन और अवैध खनन-परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बलरामपुर जिले के राजपुर में क्रेशर हादसे में आदिवासी मजदूर की मौत, प्रत्यक्षदर्शियों ने लगाए साक्ष्य मिटाने और सुरक्षा में लापरवाही के आरोप..
जानकारी के अनुसार बरियों भिलाई खुर्द इलाके में सिंघल क्रेशर में रविवार दोपहर करीब 2 बजे से 2:30 बजे के बीच क्रेशर के झरना की सफाई कराई जा रही थी। इसी दौरान वहां लगा करीब डेढ़ क्विंटल वजनी लोहे का कीप अचानक टूटकर मजदूर के ऊपर गिर पड़ा। हादसे में मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि घायल को निकालने में करीब एक घंटे का समय लगा। इसके बाद उसे स्कॉर्पियो वाहन से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शी मजदूरों ने लगाए कई गंभीर आरोप
घटना के प्रत्यक्षदर्शी मजदूर अर्पण एक्का और जीवन खाखा ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 2 बजे से 2:30 बजे के बीच लुंडरा ब्लॉक के खरकोना निवासी 20 वर्षीय अनमोलद्वारा क्रेशर प्लांट की सफाई का कार्य कराया जा रहा था। अनमोल कन्वयर बेल्ट की सफाई कर रहा था तभी ऊपर से लोहे की जाली उसपर गिर गई और वो दबा रहा। काम कर रहे मजदूरों ने जेसीबी की मदद से उसे निकाला।
अचानक “सोल” टूट गया, जिससे अनमोल केनवर बेल्ट के नीचे दब गया।अर्पण के अनुसार, घायल को बाहर निकालने में लगभग एक घंटे का समय लगा। उसे लेकर मिशन अस्पताल अंबिकापुर गए।मौत के बाद पोस्टमार्टम जिला अस्पताल में हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। जेसीबी की मदद से प्लांट को पलटकर अनमोल को बाहर निकाला गया, जिसके बाद उसे स्कॉर्पियो वाहन से अस्पताल ले जाया गया।
मजदूर जीवन ने आरोप लगाया कि अस्पताल ले जाते समय तथ्य छुपाने की कोशिश हुई।कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि क्रेशर में काम करने वाले मजदूरों को सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के उपकरण या सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।
नाबालिग मजदूरों से काम कराने के लग रहे आरोप..
मृतक की वास्तविक उम्र पर भ्रम है, कुछ लोग उसकी उम्र 17 वर्ष बता रहे हैं।घटना के बाद क्षेत्र में संचालित क्रेशर प्लांटों में नाबालिग मजदूरों से काम कराए जाने का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई क्रेशर संचालक नियमों को दरकिनार कर नाबालिगों से मजदूरी करा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।बताया जा रहा है कि हादसा सिंघल क्रेशर में हुआ, जो पहले विजय सिंघल के नाम से संचालित था। बाद में यह क्रेशर मुकेश अग्रवाल को बेच दिया गया था। वर्तमान में मुकेश अग्रवाल अन्य तीन-चार साझेदारों के साथ मिलकर इसका संचालन कर रहे थे।
नियमों को तक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड गिट्टी वाहन
क्रेशर हादसे के बाद इलाके में अवैध गिट्टी परिवहन और ओवरलोड वाहनों का मुद्दा भी गर्म हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-रात सैकड़ों ओवरलोड गिट्टी वाहन गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय आंख मूंदे बैठे हैं। कथित मिलीभगत से बिना जीएसटी बिल और पिटपास के ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। ये वाहन सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश और झारखंड तक गिट्टी पहुंचा रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।



