छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा में उमड़ी भीड़, "गौरलाटा चलो" पहल को मिला शानदार समर्थन

छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा में उमड़ी भीड़, "गौरलाटा चलो" पहल को मिला शानदार समर्थन

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 छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा में उमड़ी भीड़, "गौरलाटा चलो" पहल को मिला शानदार समर्थन..




अंबिकापुर।बलरामपुर 

(समाचारवाणी) 

बलरामपुर जिले के चांदो क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मगाजी में स्थित छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम वादियों के लिए प्रसिद्ध है।
इस रविवार बड़ी संख्या में युवा प्रकृति प्रेमी गौरलाटा पहुंचे और देखते ही देखते चोटी पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि जिलेवासियों में अपनी प्राकृतिक धरोहरों को लेकर प्रेम और उत्साह लगातार बढ़ रहा है।

बलरामपुर जिले के चांदो क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मगाजी में स्थित छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम वादियों के लिए प्रसिद्ध है। इतनी खूबसूरत जगह होने के बावजूद यहां पर्यटकों की आवाजाही बहुत कम देखने को मिलती थी।

बलरामपुर जिले के लोग अक्सर दूर-दराज के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने जाते हैं, लेकिन अपने ही जिले में मौजूद गौरलाटा जैसी प्राकृतिक धरोहर अभी भी लोगों की पहुंच और पहचान से दूर है। स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बलरामपुर अपडेट्स (Instagram/Facebook पेज) के संचालक प्रशांत कुमार नाग द्वारा "गौरलाटा चलो" पहल की शुरुआत की गई।

रविवार को इस पहल का शानदार असर देखने को मिला। कम समय में ही बड़ी संख्या में लोग गौरलाटा पहुंचे और देखते ही देखते चोटी पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि जिलेवासियों में अपनी प्राकृतिक धरोहरों को लेकर प्रेम और उत्साह लगातार बढ़ रहा है।



इस पहल को सफल बनाने में All India Trip पर निकले विशाल खरे (@jvishalraj_khare), बलरामपुर अपडेट्स के साथ-साथ अपना बलरामपुर, अपना कुसमी और अन्य स्थानीय सोशल मीडिया पेजों, कंटेंट क्रिएटर एवं ब्लॉगर साथियों तथा स्थानीय लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

विशाल खरे ने गौरलाटा की खूबसूरत वादियों को करीब से देखा और इस प्राकृतिक स्थल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। वहीं सभी क्रिएटर साथियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह पहल और भी सफल हुई।

गौरलाटा पहुंचे लोगों ने पर्यटन के साथ-साथ स्वच्छता का संदेश भी दिया। स्वच्छ भारत अभियान के तहत वहां फैले प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर नीचे लाया गया, ताकि इस प्राकृतिक स्थल की सुंदरता बनी रहे।

गौरलाटा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बलरामपुर और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। ऐसी पहलें जिले के अनदेखे पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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