अंबिकापुर
(समाचारवाणी)
अंबिकापुर नगर में हरितालिका तीज का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना की। विभिन्न स्थानों पर तीज पूजा एवं धार्मिक आयोजन संपन्न हुए, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जुड़ा है पर्व
हरितालिका तीज को हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की इसी तपस्या और दृढ़ संकल्प की स्मृति में हरितालिका तीज का व्रत रखा जाता है।
‘हरितालिका’ नाम के पीछे भी धार्मिक मान्यता जुड़ी है। कहा जाता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता के घर से वन में ले गई थीं, ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर सकें। इसी कारण इस पर्व का नाम हरितालिका पड़ा।
निर्जला व्रत और विशेष पूजा की परंपरा
हरितालिका तीज पर महिलाएं प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं। अनेक महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं। पूजा के लिए मिट्टी या बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा अथवा प्रतीक स्वरूप शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजा की जाती है।
पूजा में बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, फल, अक्षत, रोली, सिंदूर, दीप-धूप और नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद हरितालिका तीज की कथा का श्रवण एवं वाचन किया जाता है। महिलाएं माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
तीज में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व
हरितालिका तीज पर महिलाओं के सोलह श्रृंगार की भी विशेष परंपरा है। महिलाएं मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मंगलसूत्र सहित पारंपरिक श्रृंगार कर माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से तीज गीत एवं भजन प्रस्तुत करती हैं, जिससे पूरे वातावरण में उत्सव और भक्ति का रंग दिखाई देता है।
आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
हरितालिका तीज धार्मिक पर्व होने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और नारी आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। इस अवसर पर महिलाएं एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाती हैं। सामूहिक तीज आयोजन महिलाओं के बीच आपसी मेल-जोल, भाईचारे और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत करते हैं।
पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के समापन के बाद महिलाओं ने माता पार्वती और भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की। श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुए हरितालिका तीज आयोजन ने भारतीय सनातन परंपरा और संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
सरगुजा अंचल के लोक पर्व में शामिल तीजा एवं जीवतिया
तीजा और जिवतिया पर्व सरगुजा के लोक पर्व के रूप में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में लंबे समय से विद्यमान रहे हैं।पुत्र और परिवार के मंगल कामना के लिए ग्रामीण अंचल में महिलाएं तीजा और जीवितियां पर्व परंपरागत रूप से मनाती आ रही है, और सामूहिकता के साथ स्थानीय परिवेश में यह दोनों पर्व संतान और पति के साथ पूरे परिवार के मंगल कामनाओं से जुड़े हैं।ग्रामीण महिलाएं इस पर्व में स्थानीय फल एवं सब्जियों को भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
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