अंबिकापुर (सरगुजा)
Samachar Vani news, 26 july 24
अंबिकापुर रेणुकूट रेल लाइन का संकल्प छत्तीसगढ़ विधानसभा से आज 26 जुलाई 2024 को सर्वसम्मति से पारित हुआ। केंद्र सरकार को भेजे जा रहे संकल्प प्रस्ताव में अंबिकापुर रेणुकूट रेल लाईन विस्तार हेतु सभी ज़रूरी कारण और पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई है।इस संकल्प प्रस्ताव को लाने वाले विधायक श्री धर्मजीत सिंह एवं इसके चर्चा में सहभागी सभी मंत्री और विधायक गण का सरगुजा के नागरिकों ने आभार व्यक्त करते हुए,इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। सरगुजा रेल विस्तार आंदोलन समिती ने आज अंबिकापुर घड़ी चौक पर हर्ष व्यक्त करते हुए विधायक धर्मजीत सिंह सहित मंत्री विधायकों की सार्थक भूमिका पर खुशी ज़ाहिर की।
पिछले काफी समय से सरगुजा संभाग में रेल सेवाओं के विस्तार हेतु लगातार संघर्षरत सर्वदलीय रेलवे संघर्ष समिति अम्बिकापुर से रेनुकूट रेल लाईन को जोड़ने की मांग कर रही है। वह इसे लेकर सितंबर 2023 में रेनुकूट से अम्बिकापुर तक पदयात्रा तक कर चुकी है। जिसमें यूपी, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोग काफी संख्या में सम्मिलित हुए थे।
यह मांग कोई राजनीति का हिस्सा या कोई व्यक्तिगत लाभ लेने का नहीं है। इसके कई कारण हैं। यदि इसे जिला एवं राज्यस्तर के जनप्रतिनिधि समझ लें तो सरगुजा का भला हो जायेगा। रेलवे का विस्तार सालों साल बाद होता है, काफी राशि खर्च होती है और काफी प्रयत्नों के बाद ऐसी किसी परीयोजना पर रेल मंत्रालय और केंद्र सरकार बजट उपलब्ध कराती है। सरगुजावासियों से बेहतर इसे कौन समझ सकता है कि करोड़ों-अरबों का खनिज हर साल देने के बाद भी रेल सेवा के मामले में हम काफी पीछे हैं।
आज भी शिक्षा, चिकित्सा एवं व्यापारिक दृष्टि से बाहर के शहरों में जाने हेतु सरगुजा संभाग के लोगों को अनूपपुर, बनारस अथवा रायपुर से रेल सेवा मिलती है। यदि अम्बिकापुर से रेनुकूट रेल सेवा का विस्तार होता है तो बनारस के जरिये अम्बिकापुर एक ऐसे रेलवे जोन या जंक्शन से जुड़ जायेगा जहां से देश के लगभग हर क्षेत्र में आने जाने हेतु सरल एवं सहज कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। देश की राजधानी दिल्ली जहां राजनीतिक, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापारिक सहित कई आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु लोग जाते हैं उन्हें वहां के लिए सुलभ एवं सरलता से साधन उपलब्ध होगी। जो काफी कम समय में देश की राजधानी से सीधे सरगुजा संभाग ही नहीं बल्कि सिंगरौली क्षेत्र के लोगों को भी अच्छी सुविधा मिल सकेगी।
पूर्व सरगुजा सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह, वर्तमान सांसद चिंतामणि महाराज, रेनुकूट, सिंगरौली सहित कई संसदीय क्षेत्रों से सांसदों ने सरगुजा सर्वदलीय रेलवे संघर्ष समिति के इस मांग पर सहमति दर्शाते हुए अम्बिकापुर से रेनुकूट रेल लाईन के विस्तार हेतु न सिर्फ प्रधानमंत्री एवं रेलवे मंत्रालय को पत्र लिखा है, बल्कि रेलवे मंत्री से मुलाकात कर इसकी आवश्यकता एवं उपयोगिता को लेकर सार्थक चर्चा हुई है। रेलवे मंत्रालय भी अम्बिकापुर से रेनुकूट एवं अम्बिकापुर से विंढमगंज रेलवे लाईन को लेकर सर्वे सहित कई प्रक्रिया पूर्ण कर चुका है। रेलवे संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि दोनों में से किसी एक रेलवे लाईन को जल्द ही मंत्रालय अपनी हरी झंडी दिखायेगा और जल्द ही रेल लाईन का विस्तार होगा।
सरगुजा में बरवाडीह रेल लाईन पर सहमति क्यों नहीं
शिक्षा, चिकित्सा एवं देश के अन्य बड़े शहरों से कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी लोग रेनुकूट व बनारस रूट को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि लोगों का मानना है, अम्बिकापुर-बरवाडीह रेल लाईन अंग्रेजों की जरूरत थी। आज उसकी प्रासंगिकता समझ से परे है, ऐसे में उस रेल लाईन की मांग अथवा उसका विस्तार रुपये की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं।
लागत एवं राजस्व की दृष्टि से भी सफेद हाथी साबित होगा बरवाडीह लाईन
रेनुकूट से अम्बिकापुर रेल लाईन की जहां दूरी कम व लागत कम है। वहीं इस लाईन से सिंगरौली के जुड़ जाने से रेलवे को प्राप्त होने वाला राजस्व लगभग 14% के आसपास मिलने की संभावना जतायी जा रही है। वहीं इस लाईन पर पीपीपी मॉडल पर काम करने को भी कुछ कोल कम्पनियां तैयार हैं। वहीं रेनुकूट से कनेक्टिविटी मतलब सीधे बनारस से जुड़ाव, इसका फायदा यह होगा कि देश के लगभग बड़े शहरों से जुड़ाव सुगम हो पायेगा।
वहीं बरवाडीह रेल लाईन की लंबाई जहां अधिक है, वहीं दूरी भी अधिक है। बताया जा रहा है कि पीपीपी मॉडल पर काम करने किसी भी कोल कम्पनी ने इंटरेस्ट नहीं लिया, वहीं रेलवे को प्राप्त होने वाले राजस्व एवं कनेक्टिविटी के मामले में भी फेलियर साबित होगा।यही कारण है कि सरगुजा संभाग सहित रेनुकूट, सिंगरौली तक के लोग रेनुकूट से अम्बिकापुर को जोड़ने की वकालत कर रहे हैं।
अंबिकापुर घड़ी चौक पर आज शाम हर्ष व्यक्त करते हुए नागरिक और रेल विस्तार संघर्ष समिती सदस्य
Samachsr vani news desk, ambikapur



