अंबिकापुर (सरगुजा)
(Samachar Vani news)
अंबिकापुर बरवाडीह सरगुजा रेल संघर्ष समिति की पहली बैठक आज रामानुजगंज रोड स्थित कार्यालय में संपन्न हुई. आगामी रणनीति, आंदोलन के रोड मैप पर चर्चा कर देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को रेल संघर्ष समिति की ओर से मांग पत्र प्रेधित किया गया.
मांग पत्र में उल्लेख है कि अंबिकापुर-बरवाडीह रेल मार्ग परियोजना की मांग ब्रिटिश शासन काल में सन 1925 में की गई थी। जिसे ब्रिटिश शासन ने स्वीकृत करते हुए निर्माण प्रारंभ कर दिया था, परंतु द्वितीय विश्व युद्ध के कारण निर्माण कार्य रोक दिया गया। आजाद भारत में सन 1948 में इस परियोजना को फिर से मंजूरी मिली, लेकिन आज तक अधूरी है। पूर्व में कई संगठनों ने इस परियोजना की स्वीकृति हेतु मांग एवं आंदोलन भी किया, जिसके फलस्वरुप इस इस रेलमार्ग का सर्वे का कार्य पूर्ण हो गया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णुदेव साय जी. सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज . पलामू सांसद श्री बी. डी. राम , केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी से मिलकर अंबिकापुर-बरवाडीह रेलमार्ग यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान करते हुए निर्माण कराए जाने की मांग किया गयाहै। पूर्व में भी सरगुजा सांसद श्रीमती रेणुका सिंह , श्री राम विचार नेताम . पलामू सांसद श्री बी. डी. राम ने भी इस रेलमार्ग के लिए संसद में आवाज उठाई थी। आजादी के 78 साल पूर्ण होने तथा 21 वीं सदी में बलरामपुर एक ऐसा जिलाहै, जिसमें एक मीटर भी रेलवे लाइन नहीं है। अंबिकापुर बरवाडीह रेलमार्ग उत्तरी छत्तीसगढ़ के लिए हृदय रेखा के समान है। सरगुजा तथा पलामू संभाग आदिवासी बाहुल्य पिछड़ा क्षेत्र है। इस रेलमार्ग के निर्माण से इस क्षेत्र के 30 से 40 लाख निवासियों के जीवन में विकासात्मक परिवर्तन आएगा साथ ही रोजगार, यातायात, पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे। सरगुजा संभाग में बिहार, झारखंड, पश्चिमबंगाल, मध्यप्रदेश के लोग बहुतयात में जीवन यापन, व्यापार, नौकरी आदि करते हैं। लोग पर्व त्यौहार, शादी-विवाह इलाज, व्यापार, पर्यटन हेतु आवागमन करते है. यह क्षेत्र कोयला जैसे खनिज से भरा पड़ा है. जिसके परिवहन हेतु भी रेल मार्ग की आवश्यकता है।
कम होगी मुंबई कोलकाता की दूरी
अंबिकापुर-बरवाडीह रेलमार्ग निर्माण हो जाने पर कोलकाता मुंबई की दूरी 400 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इस क्षेत्र के निवासी बड़े महानगर मुंबई, कोलकाता, भोपाल, रांची, पटना, जमशेदपुर, पुरी, पुरी, कटनी आदि से सीधे जुड़ जाएंगे। धार्मिक पर्यटन देवघर उज्जैन, कामाख्या मंदिर तथा इलाज एवं पढ़ाई हाई के दृष्टिकोण से भी रांची, धनबाद, कोलकाता, जबलपुर भोपाल भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। अंबिकापुर- बरवाडीह रेलमार्ग स्वीकृति निर्माण की प्रतीक्षा में लगे नागरिकों ने अब संघर्ष तेज़ करने हेतु लोगों से इस मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया है, जिससे एक बड़े आबादी, इलाके के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके.सरगुजा रेलसंघर्ष समिति ने आज बैठक में अनेक बिंदुओं पर चर्चा की.
आज की बैठक में बड़ी संख्या में संघर्ष समिति सदस्य मौजूद रहे.
(समाचार वाणी न्यूज़ डेस्क, अंबिकापुर)



