राजपुर
समाचार वाणी
नगर पंचायत राजपुर के अध्यक्ष धरम सिंह ने आज प्रेस नोट ज़ारी कर पूर्व के आरोप का खंडन किया और वस्तुस्थिति की जानकारी से नागरिकों को अवगत कराया है।
इन्होंने कहा कि समाचार पत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर दिनांक 30.08.2024 को नगर पंचायत राजपुर के 4 पार्षदों द्वारा श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी (रा) राजपुर में ज्ञापन सौंप कर अध्यक्ष का छवि धुमिल किया जा रहा है। जिसके बारे में मेरा निम्नांकित कथन है।
पार्षद निधी से कार्य कराने हेतु पी.आई.सी. में अनुमोदन होता है। चुकि पी.आई.सी. का बैठक हर समय नहीं होता है। कार्य समय पर हो जाए इसलिए पीआई सी. का मुखिया अध्यक्ष होने के नाते अध्यक्ष से प्रत्याशा में, कराने जाने वाले कार्य का अनुमोदन कराया जाता है। जिसकाई स्वीकृत किया जाता है। जिस भी पार्षद द्वारा अपने मद से कार्य कराये जाने हेतु आवेदन दिया जाता है। सभी की अनुसशा अनुमोदन अध्यक्ष एवं पी.आई.सी. द्वारा किया जाता है। किसी भी पार्षद का आवेदन अस्वीकृत नहीं किया गया है। पी. आई.सी. में अनुमोदन के पश्चात कार्य करायें या ना करायें की जिम्मेदारी नगर पंचायत के अधिकारीयों की होती है।
पार्षद निधि से कराये गये कार्यों का भुगतान या आकंलन में अध्यक्ष की भूमिका नहीं होती है। पार्षदों द्वारा अपने वार्ड में कराये गये कार्यों का सतुष्टी प्रमाण पत्र एवं भुगतान की अनुशंसा किया जाता है। जिसके पश्चात ही नगर पंचायत अधिकारी द्वारा भुगतान किया जाता है। जिसमें इस प्रकिया में अध्यक्ष द्वारा भ्रष्टाचार की भूमिका कैसे हो सकती है। यह शिकायतकर्ता, पार्षद को स्पष्ट करना चाहिए।
इसी तरह शासन से प्राप्त आबंटित राशि से अधिक राशि का भुगतान का आरोप लगाया गया है। वार्डों में आवश्यकता जरूरत के आधार पर विभिन्न समयों पर विभिन्न कार्य कराये जाते हैं। अतः शासन से राशि प्राप्त होने की कोई निश्चित समय नहीं होती है। ऐसे में जिन वार्डों के पार्षद कोई कार्य अपने निधि से कराना चाहते हैं। उनके द्वारा अनुशंसा किये गये कार्य प्रकियाधिन रहते हैं, तथा शासन से राशि प्राप्त होने पर प्राप्त राशि का व्यय कि गई पार्षद निधि में समायोजित कर दी जाती है। इसमें कोई अनियमितता या भ्रष्टाचार वाली बात का सवाल ही नहीं उठता।
अपने प्रेस नोट में अध्यक्ष धरम सिंह ने कहा कि इसी तरह अध्यक्ष निधि का शासन से प्राप्त आबंटित राशि से अधिक का कोई कार्य नहीं कराया गया है। जो कि कतिपय पार्षद के द्वारा गलत आरोप लगाया जा रहा है, जिसका सत्यापन नगर पंचायत कार्यालय से किया जा सकता है।जिन असंतुष्ट पार्षदा को अपने निधि के कराये कार्यों से संतुष्ट नहीं हैं, वे अपने कार्यों का उच्च अधिकारियों से जांच कराकर संतुष्ट होवें। अध्यक्ष के उपर गलत आरोप लगा कर अध्यक्ष एवं सम्मानित पार्षदों की छवि धुमिल करने का प्रयास किया जा रहा है जो गलत है ।


