बलरामपुर
(समाचारवाणी)
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बड़े शोर-शराबे के साथ शुरू की जा रही तथाकथित “गौधाम योजना” का वर्चुअल शुभारंभ किया जा रहा है। कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने गोधन योजना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए किस भाजपा सरकार की कॉपी स्कीम ही निरूपित किया है।
इसी क्रम में बलरामपुर जिले के ग्राम देवीगंज, विकासखंड रामचंद्रपुर में “सुरभि गौधाम” का वर्चुअल उद्घाटन विभिन्न जनप्रतिनिधियों और अतिथियों की मौजूदगी में किया जा रहा है। लेकिन इस पूरे आयोजन के पीछे की सच्चाई को भी जनता समझ रही है।
दरअसल, यह कोई नई योजना नहीं है बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई “गोठान योजना” को नया नाम, नया बोर्ड और नया प्रचार देने की कोशिश भर है।जिस योजना को पहले कोस-कोस कर बदनाम किया गया, आज उसी के ढांचे पर नई रंगाई-पुताई करके उसे “महत्वाकांक्षी योजना” बताने की कोशिश हो रही है।
कांग्रेस के बलरामपुर जिला उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने आज प्रेस नोट ज़ारी करते हुए कहा कि अगर गोठान योजना इतनी ही खराब थी, तो आज उसी मॉडल को नया नाम देकर फिर क्यों शुरू किया जा रहा है?और अगर वह योजना अच्छी थी, तो फिर उसे वर्षों तक राजनीतिक निशाना क्यों बनाया गया?आज हालात यह हैं कि जहाँ पहले गोठान में पशु, चारा और गतिविधियाँ दिखाई देती थीं, वहाँ अब कई जगह सिर्फ ताले, टूटे शेड और फोटो खिंचवाने की औपचारिकता बची है।
गायों के नाम पर राजनीति करने वाले आज गौ सेवा के बजाय गौ प्रचार में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
गाँवों में आवारा पशु सड़कों पर भटक रहे हैं, किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए रात-रात भर जाग रहे हैं, लेकिन समाधान के बजाय वर्चुअल उद्घाटन और मंचीय भाषण ही दिखाई दे रहे हैं।
यह भी कम विडंबना नहीं किजमीन पर व्यवस्था कमजोर है और मंच पर तालियाँ मजबूत।जनता पूछ रही है,क्या गायों की सेवा सिर्फ नए नाम, नए बोर्ड और नए फोटो से हो जाएगी?या फिर वास्तव में ऐसी व्यवस्था बनेगी जिससे गौवंश सुरक्षित हो, किसानों को राहत मिले और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो?
आज जरूरत दिखावे की नहीं, बल्कि जमीनी काम की है।अगर सरकार सच में गौ सेवा के लिए गंभीर है तो उसे योजनाओं का नाम बदलने के बजाय उनकी कार्यप्रणाली सुधारने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
अन्यथा यह पूरा आयोजन गौ सेवा कम और राजनीतिक पुनःपैकेजिंग अधिक प्रतीत होता है।


